
Karnataka High Court ने एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा है कि शादी के दौरान किया गया सामान्य खर्च दहेज की श्रेणी में नहीं आता। कोर्ट ने इस आधार पर ससुराल पक्ष के अन्य सदस्यों के खिलाफ चल रही आपराधिक कार्यवाही को रद्द कर दिया, जबकि पति के खिलाफ मामला जारी रखने का आदेश दिया है।
अदालत ने अपने निर्णय में स्पष्ट किया कि दहेज की परिभाषा के तहत केवल वही लेन-देन आता है, जो किसी प्रकार के दबाव, मांग या शर्त के रूप में किया गया हो। सामान्य सामाजिक परंपराओं के तहत होने वाला विवाह खर्च अपने आप में दहेज नहीं माना जा सकता।
हालांकि, कोर्ट ने यह भी कहा कि यदि पति के खिलाफ लगाए गए आरोपों में पर्याप्त आधार हैं, तो उसके खिलाफ कानूनी प्रक्रिया जारी रहनी चाहिए। इस फैसले को दहेज कानून के दुरुपयोग और उसके सही अर्थ को स्पष्ट करने के लिहाज से अहम माना जा रहा है।



