कनाडा के अस्पतालों में डॉक्टरों की भारी कमी, इमरजेंसी में 24 घंटे का इंतजार क्यों?

कनाडा के अस्पतालों में इन दिनों डॉक्टरों का गंभीर संकट देखने को मिल रहा है, जिसके कारण इमरजेंसी सेवाओं तक में मरीजों को 24 घंटे या उससे अधिक समय तक इंतजार करना पड़ रहा है। यह स्थिति न केवल आम नागरिकों के लिए चिंता का विषय है, बल्कि कनाडा की विकसित और मजबूत मानी जाने वाली स्वास्थ्य व्यवस्था पर भी सवाल खड़े कर रही है। दरअसल, इस डॉक्टरों के अकाल के पीछे कई वजहें हैं, जिनमें बढ़ती आबादी, बुजुर्गों की संख्या में इजाफा, कोविड-19 के बाद का दबाव, और हेल्थकेयर स्टाफ का बर्नआउट प्रमुख हैं। महामारी के दौरान डॉक्टरों और नर्सों ने लगातार लंबे समय तक काम किया, जिससे मानसिक और शारीरिक थकान बढ़ी और बड़ी संख्या में स्वास्थ्यकर्मियों ने नौकरी छोड़ दी या रिटायरमेंट ले लिया। इसके अलावा, कनाडा में नए डॉक्टरों की भर्ती और विदेशी डॉक्टरों को लाइसेंस देने की प्रक्रिया काफी जटिल और समय लेने वाली है, जिससे जरूरत के मुताबिक स्टाफ उपलब्ध नहीं हो पा रहा है। ग्रामीण और दूरदराज के इलाकों में हालात और भी खराब हैं, जहां कई अस्पतालों को इमरजेंसी वार्ड अस्थायी रूप से बंद करने पड़े हैं। इसका सीधा असर मरीजों पर पड़ रहा है, जिन्हें गंभीर हालत में भी घंटों इंतजार करना पड़ता है या फिर दूर के शहरों में रेफर किया जाता है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो यह संकट और गहराएगा। समाधान के तौर पर सरकार से मेडिकल एजुकेशन सीटें बढ़ाने, विदेशी प्रशिक्षित डॉक्टरों के लिए लाइसेंस प्रक्रिया आसान करने, और मौजूदा स्टाफ के लिए बेहतर कार्य परिस्थितियां व मानसिक स्वास्थ्य समर्थन देने की मांग की जा रही है। साथ ही, डिजिटल हेल्थ और टेलीमेडिसिन को बढ़ावा देकर भी अस्पतालों पर पड़ने वाले दबाव को कुछ हद तक कम किया जा सकता है। कुल मिलाकर, कनाडा के अस्पतालों में डॉक्टरों की कमी एक जटिल समस्या है, जिसका समाधान केवल तात्कालिक नहीं बल्कि दीर्घकालिक नीति और निवेश से ही संभव है।
