
गलवान घाटी की घटना के बाद भारत और चीन के रिश्तों में आई खटास को कम करने की दिशा में अब दोनों देशों के बीच संवाद तेज होता दिखाई दे रहा है। BRICS शिखर सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच हुई बातचीत में सीमा पर शांति और द्विपक्षीय संबंधों को आगे बढ़ाने पर जोर दिया गया। दोनों नेताओं ने माना कि मतभेदों को विवाद का रूप नहीं लेने देना चाहिए।
भारत-चीन संबंधों में सबसे बड़ी चुनौती अब भी सीमा विवाद है। दोनों देशों के बीच करीब 3,800 किलोमीटर लंबी विवादित हिमालयी सीमा है। जून 2020 में गलवान घाटी में हुई हिंसक झड़प के बाद दोनों देशों के बीच लंबे समय तक सैन्य गतिरोध रहा। इसके बाद कई दौर की सैन्य और कूटनीतिक बातचीत के जरिए तनाव कम करने की कोशिश की गई।
अक्टूबर 2024 में हुए समझौते के बाद पूर्वी लद्दाख के कुछ क्षेत्रों में दोनों देशों की सेनाओं के पीछे हटने की प्रक्रिया आगे बढ़ी और दिसंबर 2024 तक यह प्रक्रिया पूरी होने की बात सामने आई। इसके बाद दोनों देशों ने धीरे-धीरे राजनयिक और लोगों के बीच संपर्क को सामान्य करने की दिशा में कदम उठाए।
सीमा विवाद को स्थायी रूप से सुलझाने के लिए भी बातचीत का सिलसिला जारी है। अगस्त 2026 में चीन और भारत के विशेष प्रतिनिधियों की सीमा मुद्दे पर 25वें दौर की वार्ता बीजिंग में हुई थी। इसमें सीमा निर्धारण, सीमा प्रबंधन और सीमा क्षेत्रों में शांति बनाए रखने जैसे मुद्दों पर चर्चा हुई। दोनों पक्षों ने सीमा विवाद के समाधान के लिए निष्पक्ष, उचित और दोनों को स्वीकार्य व्यवस्था तलाशने की प्रतिबद्धता दोहराई।
BRICS सम्मेलन के दौरान मोदी-जिनपिंग मुलाकात को इसी व्यापक प्रक्रिया का अगला कदम माना जा रहा है। शी जिनपिंग करीब सात साल बाद भारत पहुंचे हैं। दोनों नेताओं की बातचीत में सीमा शांति, व्यापार, निवेश और द्विपक्षीय संबंधों को स्थिर करने जैसे मुद्दे प्रमुख रहे। हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि इसे तत्काल पूर्ण संबंध सुधार नहीं माना जा सकता, क्योंकि सीमा और रणनीतिक मुद्दों पर मतभेद अभी भी मौजूद हैं।
आर्थिक मोर्चे पर भी भारत और चीन के बीच संबंध महत्वपूर्ण हैं। सीमा तनाव के बावजूद दोनों देशों के बीच व्यापार जारी रहा है और हाल के समय में उड़ानों, वीजा तथा कारोबारी संपर्क को सामान्य बनाने की दिशा में कदम उठाए गए हैं। हालांकि व्यापार असंतुलन और संवेदनशील क्षेत्रों में निवेश को लेकर भारत की चिंताएं बनी हुई हैं।
चीन की ओर से भी भारत के साथ संबंधों को रणनीतिक और दीर्घकालिक नजरिए से देखने की बात कही गई है। बीजिंग ने मतभेदों को उचित तरीके से संभालने, संवाद बढ़ाने और सहयोग के नए रास्ते तलाशने पर जोर दिया है। इससे संकेत मिलता है कि दोनों देश टकराव के बजाय बातचीत और स्थिरता को प्राथमिकता देने की कोशिश कर रहे हैं।
हालांकि, सीमा विवाद का अंतिम समाधान अभी दूर है। दोनों देशों के बीच LAC से जुड़े कई संवेदनशील मुद्दे, रणनीतिक प्रतिस्पर्धा और व्यापार असंतुलन जैसी चुनौतियां मौजूद हैं। ऐसे में मोदी-जिनपिंग बातचीत को रिश्तों में सुधार की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम जरूर माना जा सकता है, लेकिन वास्तविक बदलाव इस बात पर निर्भर करेगा कि आने वाले समय में सीमा विवाद और अन्य लंबित मुद्दों पर कितनी ठोस प्रगति होती है।



