Parliamentary Committee: अधीनस्थ विधान समिति का पुनर्गठन

संसद से पारित कानूनों के बाद बनाए जाने वाले नियमों और विनियमों पर नजर रखने वाली अधीनस्थ विधान समिति का पुनर्गठन किया गया है। यह समिति इस बात की जांच करती है कि सरकार और संबंधित विभागों की ओर से बनाए गए नियम संसद द्वारा पारित मूल कानून के अनुरूप हैं या नहीं। अधीनस्थ विधान समिति का महत्व इसलिए खास है क्योंकि संसद कानून बनाती है, जबकि उन कानूनों को लागू करने के लिए मंत्रालय और विभाग कई नियम और विनियम तैयार करते हैं। समिति इन नियमों की समीक्षा करके यह सुनिश्चित करने की कोशिश करती है कि कार्यपालिका अपने अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर कोई प्रावधान न बनाए।
समिति यह भी देख सकती है कि किसी नियम को बनाने के लिए संसद के मूल कानून में पर्याप्त अधिकार दिया गया था या नहीं। इसके अलावा नियमों के लागू होने की प्रक्रिया, उनके प्रभाव और संबंधित कानूनी प्रावधानों की भी जांच की जा सकती है। इससे कानूनों के क्रियान्वयन में जवाबदेही और संसदीय निगरानी मजबूत होती है। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने 2026-27 के लिए कई संसदीय समितियों का पुनर्गठन किया है। इनमें लोक लेखा समिति, प्राक्कलन समिति, सार्वजनिक उपक्रम समिति और अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति कल्याण समिति भी शामिल हैं।
संसदीय समितियां सदन के कामकाज को अधिक विस्तार से देखने का महत्वपूर्ण माध्यम हैं। समितियां दस्तावेजों और अधिकारियों से मिली जानकारी के आधार पर विषयों की जांच करती हैं और अपनी रिपोर्ट संसद के सामने रखती हैं। इस प्रक्रिया से विधायी और प्रशासनिक कामकाज की निगरानी में मदद मिलती है। अधीनस्थ विधान समिति का पुनर्गठन ऐसे समय में महत्वपूर्ण है जब केंद्र सरकार के विभिन्न मंत्रालयों और विभागों की ओर से बड़ी संख्या में नियम और अधिसूचनाएं जारी होती हैं। समिति की समीक्षा से यह सुनिश्चित करने में मदद मिल सकती है कि कानूनों के तहत बनाए गए नियम संसद की मंशा और निर्धारित कानूनी सीमाओं के अनुरूप रहें।



