Bab Al-Mandeb Crisis: हूती हमलों से क्रूड 100 डॉलर के पार, भारत अलर्ट

होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर जारी तनाव के बाद अब बाब अल-मंदेब क्षेत्र में बढ़ती गतिविधियों ने वैश्विक चिंता बढ़ा दी है। लाल सागर में हूती हमलों के कारण समुद्री व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति पर नए सिरे से दबाव बनने की आशंका जताई जा रही है।
बाब अल-मंदेब दुनिया के महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में शामिल है। यह मार्ग लाल सागर को अदन की खाड़ी से जोड़ता है और एशिया, यूरोप तथा मध्य पूर्व के बीच होने वाले समुद्री व्यापार के लिए काफी अहम माना जाता है।
हूती हमलों और क्षेत्रीय तनाव के बीच कच्चे तेल की कीमतों में भी तेजी देखने को मिली है। क्रूड ऑयल के 100 डॉलर प्रति बैरल के स्तर को पार करने से दुनिया की अर्थव्यवस्थाओं पर महंगे ईंधन का दबाव बढ़ने की आशंका है।
भारत के लिए यह घटनाक्रम खास तौर पर महत्वपूर्ण है, क्योंकि देश अपनी जरूरत के बड़े हिस्से के लिए कच्चे तेल के आयात पर निर्भर है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमत बढ़ने का असर आयात बिल, ईंधन कीमतों और महंगाई पर पड़ सकता है।
लाल सागर क्षेत्र में तनाव बढ़ने से समुद्री जहाजों के लिए सुरक्षा संबंधी चुनौतियां भी बढ़ सकती हैं। अगर महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों पर जोखिम बढ़ता है तो जहाजों को वैकल्पिक रास्तों का इस्तेमाल करना पड़ सकता है, जिससे परिवहन समय और लागत बढ़ सकती है।
होर्मुज और बाब अल-मंदेब दोनों ही वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिहाज से रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग हैं। ऐसे में दोनों क्षेत्रों में तनाव का असर केवल स्थानीय स्तर तक सीमित नहीं रहता, बल्कि इसका प्रभाव अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार और व्यापार पर भी पड़ सकता है।
भारत इस पूरे घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए है। खासतौर पर भारतीय जहाजों, ऊर्जा आपूर्ति और विदेशों में मौजूद भारतीय नागरिकों की सुरक्षा से जुड़े पहलुओं को लेकर स्थिति पर लगातार निगरानी जरूरी हो गई है।
आने वाले दिनों में मध्य पूर्व की स्थिति और हूती गतिविधियों का क्रूड ऑयल की कीमतों पर सीधा असर देखने को मिल सकता है। यदि तनाव लंबे समय तक बना रहता है तो वैश्विक बाजार में तेल की कीमतों और शिपिंग लागत को लेकर अनिश्चितता और बढ़ सकती है।



