
वंदे मातरम् को लेकर देश की राजनीति में एक बार फिर बहस तेज हो गई है। कांग्रेस कार्यसमिति द्वारा अपने कार्यक्रमों में वंदे मातरम् के शुरुआती दो छंदों के गायन से जुड़े 1937 के फैसले को दोहराने पर भाजपा ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। भाजपा ने इसे राष्ट्रीय गीत की ऐतिहासिक विरासत से जोड़ते हुए कांग्रेस के रुख की आलोचना की है।
भाजपा की नई राष्ट्रीय टीम की पहली बैठक में वंदे मातरम् को लेकर 10 बिंदुओं वाला प्रस्ताव पारित किया गया। पार्टी ने कहा कि राष्ट्रीय गीत के सम्मान और उसकी विरासत से किसी भी तरह का समझौता नहीं किया जाएगा। भाजपा ने इस मुद्दे को केवल राजनीतिक दलों के बीच विवाद न मानकर राष्ट्रीय सम्मान से जुड़ा विषय बताया।
प्रस्ताव में भाजपा ने वंदे मातरम् के इतिहास और स्वतंत्रता आंदोलन में इसकी भूमिका को जनता तक पहुंचाने पर जोर दिया। पार्टी ने खास तौर पर युवा पीढ़ी के बीच जागरूकता अभियान चलाने की बात कही है, ताकि राष्ट्रीय गीत से जुड़ी ऐतिहासिक घटनाओं और स्वतंत्रता संघर्ष की स्मृतियों को नई पीढ़ी तक पहुंचाया जा सके।
भाजपा ने अपने प्रस्ताव में यह भी कहा कि राजनीतिक लाभ या वोट-बैंक की राजनीति के लिए वंदे मातरम् की गरिमा और विरासत से समझौता नहीं किया जाना चाहिए। पार्टी नेतृत्व ने कांग्रेस के फैसले को लेकर सवाल उठाते हुए कहा कि किसी राजनीतिक दल का प्रस्ताव संवैधानिक संस्थाओं और संसद द्वारा बनाए गए कानूनों से ऊपर नहीं हो सकता।
इस विवाद की पृष्ठभूमि में कांग्रेस का 1937 का प्रस्ताव है, जिसके तहत वंदे मातरम् के कुछ हिस्सों को लेकर उठी आपत्तियों के बाद आधिकारिक कार्यक्रमों में शुरुआती दो छंदों के गायन की व्यवस्था अपनाई गई थी। कांग्रेस ने हालिया बैठक में इसी ऐतिहासिक फैसले को दोहराने का निर्णय लिया है।
भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन ने वंदे मातरम् को स्वतंत्रता आंदोलन और राष्ट्रीय चेतना का महत्वपूर्ण प्रतीक बताया। पार्टी का कहना है कि इस गीत की ऐतिहासिक भूमिका और राष्ट्रीय महत्व को नई पीढ़ी तक पहुंचाना जरूरी है। इस मुद्दे पर दोनों प्रमुख दलों के बीच राजनीतिक बयानबाजी और तेज होने के आसार हैं।



