
तमिलनाडु विधानसभा में शुक्रवार को परिसीमन के मुद्दे पर DMK और TVK के बीच करीब 40 मिनट तक तीखी बहस हुई। विवाद मुख्यमंत्री सी. विजय के हालिया रुख को लेकर है। DMK का आरोप है कि विधानसभा में 12 अगस्त को पारित प्रस्ताव में लोकसभा की 543 सीटों की संख्या को स्थायी रूप से फ्रीज करने की मांग की गई थी, लेकिन दक्षिणी क्षेत्रीय परिषद की बैठक में मुख्यमंत्री ने इसे स्पष्ट रूप से नहीं दोहराया।
विपक्ष ने सवाल उठाया कि अमित शाह के सामने मुख्यमंत्री ने ‘फ्रीज’ शब्द का इस्तेमाल क्यों नहीं किया। DMK नेताओं ने इसे सरकार के पुराने रुख से संभावित बदलाव के तौर पर पेश किया। दूसरी ओर, TVK ने कहा कि उसका रुख बदला नहीं है और तमिलनाडु की मौजूदा 39 लोकसभा सीटों तथा संसद में उसके हिस्से की रक्षा करना जरूरी है।
विवाद की जड़ 12 अगस्त को विधानसभा में पारित प्रस्ताव है, जिसमें मौजूदा 543 लोकसभा सीटों और राज्यों के वर्तमान सीट आवंटन को बनाए रखने की मांग की गई थी। बाद में मुख्यमंत्री विजय ने केंद्र से स्पष्ट विधायी आश्वासन मांगा कि जनसंख्या आधारित परिसीमन से दक्षिणी राज्यों की संसदीय हिस्सेदारी कम नहीं होनी चाहिए।
DMK ने इसे लेकर विजय सरकार पर दबाव बढ़ाया है। वहीं TVK का कहना है कि उसका लक्ष्य परिसीमन के दौरान तमिलनाडु के प्रतिनिधित्व को किसी भी नुकसान से बचाना है। ऐसे में ‘सीट फ्रीज’ बनाम ‘उचित प्रतिनिधित्व की गारंटी’ का अंतर अब राज्य की राजनीति में बड़ा मुद्दा बन गया है।
मुख्य बातें
- तमिलनाडु विधानसभा में परिसीमन पर DMK-TVK आमने-सामने।
- DMK ने मुख्यमंत्री विजय से ‘फ्रीज’ शब्द नहीं दोहराने पर सवाल किया।
- 12 अगस्त को विधानसभा ने 543 लोकसभा सीटों को फ्रीज करने का प्रस्ताव पारित किया था।
- TVK ने कहा कि तमिलनाडु के मौजूदा प्रतिनिधित्व की रक्षा उसका मुख्य लक्ष्य है।
- अमित शाह की मौजूदगी वाली दक्षिणी क्षेत्रीय परिषद की बैठक के बाद विवाद तेज हुआ।
- परिसीमन को लेकर दक्षिणी राज्यों के प्रतिनिधित्व पर बहस जारी है।



