
भारत में विदेशी निवेश को बढ़ावा देने के लिए चीन से जुड़े FDI नियमों में दी गई छूट का असर अब दिखाई देने लगा है। सरकार के मुताबिक, 20 अगस्त 2026 तक 29 विदेशी निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं, जिनकी कुल प्रस्तावित राशि करीब 4,895.65 करोड़ रुपये है।
दरअसल, मई 2026 में FDI नियमों में बदलाव किया गया था। नए प्रावधानों के तहत ऐसी विदेशी कंपनियां, जिनमें चीन या हांगकांग की हिस्सेदारी 10 प्रतिशत तक है, निर्धारित शर्तों को पूरा करने पर भारत में निवेश के लिए ऑटोमैटिक रूट का इस्तेमाल कर सकती हैं। इससे पहले ऐसे निवेश के लिए सरकारी मंजूरी की जरूरत पड़ती थी।
इन 29 प्रस्तावों में IT, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, सूचना एवं संचार, मैन्युफैक्चरिंग, फार्मास्यूटिकल्स, डेटा सेंटर और ट्रांसपोर्ट जैसे कई अहम सेक्टर शामिल हैं। प्रस्ताव अलग-अलग देशों में स्थित निवेशकों या संस्थाओं से जुड़े हैं, जिनमें अमेरिका, जापान, दक्षिण कोरिया, सिंगापुर, मॉरीशस और लक्जमबर्ग जैसे देश शामिल हैं।
सरकार का मानना है कि नियमों में यह बदलाव निवेश प्रक्रिया को आसान और तेज बनाने में मदद करेगा। इससे कंपनियों को सरकारी मंजूरी की लंबी प्रक्रिया से राहत मिल सकती है और भारत में कारोबार शुरू करने की समय-सीमा घट सकती है। हालांकि, संवेदनशील क्षेत्रों और निर्धारित शर्तों के तहत निवेश पर निगरानी पहले की तरह बनी रहेगी।
यह बदलाव ऐसे समय में आया है जब भारत चीन से निवेश को लेकर सुरक्षा और आर्थिक हितों के बीच संतुलन बनाने की कोशिश कर रहा है। इससे पहले वित्त वर्ष 2025-26 में भारत ने चीन के केवल एक FDI प्रस्ताव को मंजूरी दी थी, जबकि हांगकांग के 13 प्रस्तावों को मंजूरी मिली थी।
मुख्य बातें
- भारत को 29 नए FDI प्रस्ताव मिले।
- प्रस्तावित निवेश करीब ₹4,895.65 करोड़ है।
- चीन/हांगकांग की 10% तक हिस्सेदारी वाली विदेशी कंपनियों को ऑटोमैटिक रूट की सुविधा।
- IT, AI, मैन्युफैक्चरिंग, फार्मा और डेटा सेंटर जैसे सेक्टर शामिल।
- नए नियमों का उद्देश्य निवेश प्रक्रिया को आसान और तेज करना है।
- संवेदनशील निवेशों पर सरकारी निगरानी जारी रहेगी।



