India-Venezuela Oil: भारत ने बढ़ाई वेनेजुएला से कच्चे तेल की खरीद

भारत ने अपनी ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने के लिए वेनेजुएला से कच्चे तेल की खरीद बढ़ा दी है। मध्य पूर्व में जारी भू-राजनीतिक तनाव और तेल आपूर्ति मार्गों में अनिश्चितता के बीच भारतीय रिफाइनर अब लैटिन अमेरिका समेत कई क्षेत्रों से क्रूड मंगाकर अपनी सप्लाई चेन को मजबूत कर रहे हैं।
वेनेजुएला इस रणनीति में तेजी से महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। आंकड़ों के मुताबिक जून 2026 में भारतीय बंदरगाहों पर करीब 10.1 मिलियन बैरल वेनेजुएला मूल का क्रूड पहुंचा, जो मई के 10.2 मिलियन बैरल के करीब रहा। अप्रैल में यह मात्रा 8.3 मिलियन बैरल और मार्च में सिर्फ 0.9 मिलियन बैरल थी।
भारत की इस रणनीति का मकसद किसी एक देश या क्षेत्र पर तेल के लिए अत्यधिक निर्भरता को कम करना है। सरकार के अनुसार भारत अब 41 देशों से कच्चा तेल आयात कर रहा है, जबकि पहले यह संख्या 27 थी। इससे वैश्विक संकट के दौरान किसी एक सप्लाई रूट में रुकावट आने पर वैकल्पिक स्रोत उपलब्ध रहेंगे।
रूस भी भारत के तेल आयात का प्रमुख स्रोत बना हुआ है। जुलाई 2026 में भारत के कुल क्रूड आयात में रूसी तेल की हिस्सेदारी रिकॉर्ड 50.83 प्रतिशत रही। साथ ही ब्राजील और वेनेजुएला जैसे लैटिन अमेरिकी देशों से आने वाले तेल की हिस्सेदारी भी बढ़ी है।
हालांकि वेनेजुएला का भारी क्रूड हर भारतीय रिफाइनरी के लिए समान रूप से उपयुक्त नहीं है। इसे प्रोसेस करने के लिए विशेष रिफाइनिंग क्षमता की जरूरत होती है, इसलिए इसका आयात मुख्य रूप से उन रिफाइनरों के लिए ज्यादा उपयोगी है जो भारी ग्रेड के क्रूड को संभाल सकते हैं।
भारत के लिए सप्लाई स्रोतों का यह विस्तार ऐसे समय में महत्वपूर्ण है जब रूस से मिलने वाले तेल पर भी प्रतिस्पर्धा बढ़ रही है। अगस्त में चीन ने रूसी क्रूड की खरीद बढ़ाई है, जिससे भारतीय रिफाइनरों के लिए रूसी तेल की उपलब्धता प्रभावित हुई है। ऐसे में वेनेजुएला समेत लैटिन अमेरिकी स्रोत भारत के लिए अतिरिक्त विकल्प बन रहे हैं।
मुख्य बातें:
- भारत ने वेनेजुएला से क्रूड आयात बढ़ाया।
- जून में करीब 10.1 मिलियन बैरल वेनेजुएला मूल का तेल भारत पहुंचा।
- भारत अब 41 देशों से कच्चा तेल आयात कर रहा है।
- रूस अभी भी भारत का प्रमुख क्रूड सप्लायर है।
- लैटिन अमेरिका से तेल खरीद बढ़ाने का मकसद सप्लाई में विविधता लाना है।
- भू-राजनीतिक संकट के बीच ऊर्जा सुरक्षा पर भारत का फोकस बढ़ा है।



