
बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) के चेयरमैन मनन कुमार मिश्रा को हटाने की मांग को लेकर सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर होने के बाद विवाद और गहरा गया है। याचिका में उनके कार्यकाल की वैधता को चुनौती देते हुए पद से हटाने और नए चुनाव कराने की मांग की गई है। याचिकाकर्ता ने BCI के वित्तीय मामलों और नियुक्तियों की स्वतंत्र जांच की मांग भी की है।
याचिका में अप्रैल 2025 की उस अधिसूचना को चुनौती दी गई है, जिसमें मनन मिश्रा का कार्यकाल 17 अप्रैल 2025 से 16 अप्रैल 2030 तक दर्ज किया गया था। याचिका में BCI नियमों में चेयरमैन के कार्यकाल से संबंधित प्रावधानों का हवाला देते हुए इस अवधि पर सवाल उठाए गए हैं। साथ ही BCI में नेतृत्व के कार्यकाल की सीमा तय करने की मांग भी की गई है।
मनन कुमार मिश्रा ने हालांकि पद से इस्तीफा देने से साफ इनकार किया है। उनका कहना है कि उनका चयन BCI के सदस्यों ने किया है और वह देशभर के करीब 25 लाख वकीलों का प्रतिनिधित्व करते हैं। उन्होंने अपने खिलाफ चल रहे अभियान को राजनीतिक रूप से प्रेरित बताया है।
यह पूरा विवाद NALSAR यूनिवर्सिटी ऑफ लॉ के छात्रों के नामांकन से जुड़े मामले के बाद तेज हुआ। BCI ने 13 अगस्त को NALSAR के 2026 बैच के छात्रों के नामांकन को लेकर निर्देश जारी किया था, जिसे बाद में वापस ले लिया गया। इस कदम पर कानूनी बिरादरी के एक वर्ग ने सवाल उठाए और मनन मिश्रा के इस्तीफे की मांग तेज हुई।
मामले में भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की टिप्पणी के बाद भी विवाद बढ़ा। इसके बाद मनन मिश्रा ने छात्रों से जुड़े घटनाक्रम पर खेद जताया था। BCI ने भी स्पष्ट किया था कि अधिकांश छात्र निर्दोष हैं और उन्हें कुछ छात्रों के कथित आचरण के लिए जिम्मेदार नहीं ठहराया जाना चाहिए।
BCI के भीतर से भी मनन मिश्रा के इस्तीफे की मांग सामने आई है। BCI के सह-अध्यक्ष वाईआर सदाशिव रेड्डी ने उनके इस्तीफे की मांग करते हुए BCI के वित्तीय मामलों और कामकाज की स्वतंत्र जांच की जरूरत बताई। मनन मिश्रा ने इन आरोपों को खारिज करते हुए रेड्डी की स्थिति और उनके राजनीतिक संबंधों पर सवाल उठाए हैं।
अब सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका से BCI चेयरमैन के कार्यकाल, चुनाव प्रक्रिया और संस्था की जवाबदेही से जुड़े सवाल न्यायिक जांच के दायरे में आ सकते हैं। हालांकि, याचिका में लगाए गए आरोप अभी केवल दावे हैं और उन्हें अदालत द्वारा सिद्ध तथ्य नहीं माना गया है।



