Durga Puja 2025: शारदीय नवरात्र की महा सप्तमी तिथि, नवपत्रिका पूजा विधि और महत्व

दुर्गा पूजा 2025 का पर्व विशेष धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व रखता है, खासकर पश्चिम बंगाल, असम, ओडिशा और बिहार जैसे राज्यों में। इस वर्ष शारदीय नवरात्रि की महा सप्तमी तिथि अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जा रही है, क्योंकि इसी दिन देवी दुर्गा की नवपत्रिका पूजा संपन्न होती है, जिसे बंगाली परंपरा में खास महत्व प्राप्त है।
महा सप्तमी 2025 में 1 अक्टूबर को पड़ रही है, जो शारदीय नवरात्र का सातवां दिन होगा। इस दिन मां दुर्गा के ‘कालरात्रि’ स्वरूप की पूजा की जाती है। बंगाली परंपरा में सप्तमी के दिन नवपत्रिका का पूजन होता है, जिसमें नौ पत्तियों वाले पौधों (प्राकृतिक रूप से देवी के नौ रूपों का प्रतीक) को गंगा जल से स्नान कराकर पूजा स्थल पर स्थापित किया जाता है। इस अनुष्ठान को “नवपत्रिका स्नान” या “कलाबौ स्नान” भी कहा जाता है।
नवपत्रिका पूजा विधि में सर्वप्रथम केले के पत्ते के साथ अन्य आठ पवित्र पौधों को एक साथ बाँधकर स्नान कराया जाता है। फिर उन्हें धोती में लपेट कर देवी के समीप स्थापित किया जाता है। यह प्रतीकात्मक रूप से शक्ति की नौ रूपों को आमंत्रित करने की परंपरा है। इसके पश्चात महा सप्तमी की पूजा विधिपूर्वक की जाती है, जिसमें दुर्गा सप्तशती का पाठ, मंत्रोच्चारण, पुष्पांजलि और आरती शामिल होती है।
इस दिन व्रत, उपवास और पूजा से विशेष पुण्य की प्राप्ति होती है। मान्यता है कि जो भक्त श्रद्धा से महा सप्तमी पर नवदुर्गा की पूजा करता है, उसके सभी कष्ट दूर होते हैं और जीवन में सुख, शांति व समृद्धि आती है। दुर्गा पूजा के ये नौ दिन भक्तों के लिए आत्मशुद्धि और शक्ति आराधना के श्रेष्ठ अवसर होते हैं।



