धर्म-आस्था
कन्नप्पा की भक्ति कथा: शिवलिंग पर पैर क्यों रखा और क्यों दी अपनी आंखें

भगवान शिव के परम भक्त कन्नप्पा की कहानी भक्ति और समर्पण का अद्भुत उदाहरण मानी जाती है। कन्नप्पा एक साधारण शिकारी थे, जिन्हें पूजा-पाठ की विधियों का ज्ञान नहीं था, लेकिन उनकी आस्था बेहद सच्ची थी।
कथा के अनुसार, जब उन्होंने देखा कि शिवलिंग से खून बह रहा है, तो उन्होंने बिना सोचे-समझे अपनी एक आंख निकालकर शिवलिंग पर रख दी, ताकि ‘भगवान’ का घाव ठीक हो सके। जब दूसरी आंख भी निकालने की बारी आई, तो उन्होंने अपने पैर से शिवलिंग को छूकर उस जगह का निशान बनाया, ताकि अंधे होने के बाद भी सही स्थान पर आंख रख सकें।
उनकी इस अटूट भक्ति से प्रसन्न होकर भगवान शिव स्वयं प्रकट हुए और उन्हें आशीर्वाद दिया। यह कहानी सिखाती है कि सच्ची श्रद्धा और समर्पण किसी भी नियम या विधि से ऊपर होता है।



