धर्म-आस्था

नवंबर 2025 सोम प्रदोष व्रत: भगवान शिव की कृपा पाने का श्रेष्ठ दिन

नवंबर 2025 का सोम प्रदोष व्रत आज बड़ी श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया जा रहा है। सोमवार के दिन पड़ने वाला यह व्रत भगवान शिव और माता पार्वती की विशेष कृपा प्राप्त करने वाला माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, जो भक्त प्रदोष काल में शिव–पूजन करता है, उसे स्वास्थ्य, समृद्धि और मनोवांछित फल की प्राप्ति होती है। सोमवार को पड़ने वाला प्रदोष व्रत अत्यंत शुभ माना गया है क्योंकि यह ‘शिववार’ और ‘प्रदोष’ दोनों का संयोग होता है।

इस दिन भक्त प्रातः स्नान कर व्रत का संकल्प लेते हैं और पूरे दिन फलाहार या जलाहार करके व्रत का पालन करते हैं। प्रदोष काल—यानी सूर्यास्त से लेकर लगभग ढाई घंटे के भीतर—शिव की पूजा विशेष फलदायी मानी जाती है। शिवलिंग पर जल, दूध, दही, घी, शहद और गंगाजल से अभिषेक किया जाता है। बेलपत्र, धतूरा, आक के फूल, चंदन और अक्षत चढ़ाए जाते हैं। ‘ॐ नमः शिवाय’ मंत्र का जाप कम से कम 108 बार करने से मन की शांति और सकारात्मक ऊर्जा बढ़ती है।

सोम प्रदोष के दिन दान को अत्यंत पुण्यकारी बताया गया है। शास्त्रों के अनुसार, भगवान शिव को सफेद वस्तुएँ अति प्रिय हैं। ऐसे में सफेद वस्त्र, चावल, दूध, दही, चीनी, सफेद तिल और गौ-दान के रूप में भोजन खिलाना अत्यंत फलदायी माना गया है। जरूरतमंदों को भोजन कराना, जल का दान करना और ब्राह्मणों को दक्षिणा देना भी पुण्य बढ़ाता है।

कथाओं में वर्णित है कि प्रदोष व्रत से भक्त की सभी मनोकामनाएँ पूरी होती हैं और जीवन से नकारात्मकता दूर होती है। कहा जाता है कि इस व्रत से विशेष रूप से विवाह में आने वाली अड़चनें दूर होती हैं, आर्थिक समस्या हल होती है और परिवार में सुख-शांति का वातावरण बनता है।

सोम प्रदोष व्रत न सिर्फ आस्था का प्रतीक है, बल्कि आत्मसंयम और मानसिक शुद्धि का मार्ग भी है। भक्त अपने मन में शिव–भक्ति का प्रकाश जलाकर भगवान भोलेनाथ से अपने जीवन में कल्याण, सफलता और उन्नति की कामना करते हैं। आज के इस विशेष दिन पर शिव-आराधना और दान का महत्व कई गुना बढ़ जाता है, इसलिए हर भक्त को श्रद्धा और पवित्र मन से पूजा करनी चाहिए।

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