धर्म-आस्था

Pitru Paksha 2025: पितृ दोष से बचने के उपाय और गरुड़ पुराण में बताए गए नियम

पितृ पक्ष 2025 हिंदू पंचांग के अनुसार भाद्रपद पूर्णिमा के अगले दिन से शुरू होकर आश्विन अमावस्या तक चलता है। यह 16 दिनों का समय पूर्वजों की आत्मा की शांति और आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। धार्मिक मान्यता है कि इस अवधि में श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान के माध्यम से पितरों को तृप्त करने से उनका आशीर्वाद प्राप्त होता है। लेकिन कई बार लोग अनजाने में कुछ गलतियां कर बैठते हैं, जिससे पितृ दोष लग सकता है। गरुड़ पुराण में स्पष्ट बताया गया है कि पितृ पक्ष के दौरान मांसाहार, मद्यपान, झूठ बोलना, दूसरों का अपमान करना, ब्राह्मण और जरूरतमंद की अवहेलना करना वर्जित है। इन कार्यों से पितरों की कृपा कम हो सकती है और जीवन में बाधाएं आ सकती हैं।

गरुड़ पुराण के अनुसार पितृ दोष से बचने के लिए श्राद्ध कर्म सही विधि से करना चाहिए। तर्पण के दौरान स्वच्छ जल, तिल और कुश का प्रयोग जरूरी है। पिंडदान में जौ, चावल और तिल का मिश्रण उपयोगी माना गया है। ब्राह्मणों को भोजन कराना और दान देना पितरों को प्रसन्न करने का श्रेष्ठ तरीका है। पितृ पक्ष में जरूरतमंदों को भोजन, वस्त्र और दक्षिणा दान करने से पूर्वज प्रसन्न होते हैं और वंश में सुख-समृद्धि आती है।

इसके अलावा, पितृ पक्ष में नई वस्तुओं की खरीद, विवाह, गृह प्रवेश या कोई शुभ कार्य करने से बचना चाहिए। यह समय केवल पितरों के स्मरण और तर्पण का होता है। मान्यता है कि जो व्यक्ति पितृ पक्ष में श्रद्धा और नियमपूर्वक कर्म करता है, उसे न केवल पितरों का आशीर्वाद मिलता है, बल्कि उसके जीवन में आ रही रुकावटें भी दूर होती हैं। इसलिए पितृ पक्ष 2025 में गरुड़ पुराण में बताए गए नियमों का पालन करके पितृ दोष से बचा जा सकता है और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार किया जा सकता है।

Zee NewsTimes

Founded in 2018, Zee News Times has quickly emerged as a leading news source based in Lucknow, Uttar Pradesh. Our mission is to inspire, educate, and outfit our readers for a lifetime of adventure and stewardship, reflecting our commitment to providing comprehensive and reliable news coverage.

संबंधित समाचार

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button