Pradosh Vrat 2025: भाद्रपद महीने का अंतिम प्रदोष व्रत कब है? जानें तिथि, महत्व और पूजा मुहूर्त

हिंदू पंचांग में प्रदोष व्रत का विशेष महत्व बताया गया है। यह व्रत भगवान शिव को समर्पित होता है और हर महीने की त्रयोदशी तिथि को रखा जाता है। जब यह व्रत सोमवार को आता है तो सोम प्रदोष कहलाता है, मंगलवार को मंगल प्रदोष और शनिवार को शनि प्रदोष। भाद्रपद महीने का अंतिम प्रदोष व्रत 2025 में विशेष फलदायी माना जा रहा है क्योंकि इस दिन भगवान शिव की पूजा करने से जीवन की नकारात्मक ऊर्जा समाप्त होती है और भक्तों को स्वास्थ्य, धन और समृद्धि का आशीर्वाद प्राप्त होता है।
भाद्रपद महीने के अंतिम प्रदोष व्रत की तिथि और मुहूर्त
पंचांग के अनुसार भाद्रपद मास का अंतिम प्रदोष व्रत रविवार, 14 सितंबर 2025 को पड़ रहा है। इस दिन त्रयोदशी तिथि का प्रारंभ सुबह से ही होगा और प्रदोष काल की पूजा सायंकाल सूर्यास्त के बाद की जाएगी। प्रदोष व्रत में भगवान शिव की पूजा प्रदोष काल यानी सूर्यास्त से लगभग 45 मिनट पहले से 45 मिनट बाद तक करना श्रेष्ठ माना जाता है।
पूजा मुहूर्त (अनुमानित):
- प्रदोष काल प्रारंभ: शाम 6:35 बजे
- प्रदोष काल समाप्त: रात 8:55 बजे
(सटीक मुहूर्त स्थान अनुसार बदल सकता है।)
प्रदोष व्रत का महत्व
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार प्रदोष व्रत रखने से व्यक्ति के सभी पाप नष्ट होते हैं और जीवन में आने वाली कठिनाइयों का समाधान मिलता है। कहा जाता है कि इस व्रत को रखने से कुंडली के ग्रह दोष भी शांत होते हैं और विशेष रूप से शनि और मंगल की पीड़ा कम होती है। भाद्रपद मास का प्रदोष व्रत इसलिए भी खास है क्योंकि इस महीने को पितृपक्ष और श्राद्ध से पहले का समय माना जाता है, जब शिव की उपासना करने से पितरों की आत्मा को भी शांति मिलती है।
पूजा विधि
- व्रतधारी को सुबह स्नान कर संकल्प लेना चाहिए और दिनभर उपवास रखना चाहिए।
- सायंकाल प्रदोष काल में शिवलिंग पर जल, दूध, बेलपत्र, धतूरा, अक्षत और भस्म अर्पित करनी चाहिए।
- भगवान शिव के साथ माता पार्वती और नंदी की भी पूजा करनी चाहिए।
- इस दिन शिवपुराण का पाठ और महामृत्युंजय मंत्र का जाप करना अत्यंत फलदायी माना जाता है।
- व्रत का समापन आरती और प्रसाद वितरण के साथ किया जाता है।
प्रदोष व्रत से मिलने वाले लाभ
- जीवन में सुख-समृद्धि और शांति आती है।
- शत्रु बाधाओं और ग्रह दोषों से मुक्ति मिलती है।
- स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं में लाभ मिलता है।
- अविवाहितों को उत्तम जीवनसाथी की प्राप्ति होती है।
- संतान सुख और पारिवारिक कल्याण के लिए यह व्रत अत्यंत प्रभावी है।
भाद्रपद महीने का यह अंतिम प्रदोष व्रत भक्तों के लिए आध्यात्मिक ऊर्जा बढ़ाने और भगवान शिव का विशेष आशीर्वाद पाने का उत्तम अवसर है। अतः इस दिन श्रद्धापूर्वक व्रत और पूजा-अर्चना करने से हर तरह की मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।



