सतुआ संक्रांति 2026: बिहार में बैसाखी पर क्यों मनाई जाती है सतुआनी

Sattu Sankranti, जिसे बिहार और पूर्वी भारत में सतुआनी के नाम से भी जाना जाता है, हर साल Baisakhi के दिन बड़े श्रद्धा भाव से मनाया जाता है। यह पर्व मुख्य रूप से गर्मी के मौसम की शुरुआत और नई फसल के स्वागत से जुड़ा होता है। इस दिन लोग सत्तू का सेवन करते हैं और धार्मिक रूप से दान-पुण्य करते हैं।
मान्यता है कि सतुआ संक्रांति के दिन सत्तू, गुड़, चना, आम और जल का दान करना अत्यंत शुभ माना जाता है। इससे जीवन में सुख-समृद्धि आती है और गर्मी के मौसम में शरीर को ठंडक मिलती है।
बिहार और आसपास के क्षेत्रों में लोग इस दिन नदी या पवित्र जल स्रोतों पर स्नान करके सूर्य देव की पूजा करते हैं। इसके बाद सत्तू से बने व्यंजन ग्रहण किए जाते हैं, जो स्वास्थ्य के लिए भी लाभकारी माने जाते हैं।
यह पर्व केवल धार्मिक नहीं बल्कि सामाजिक और स्वास्थ्य से जुड़ी परंपरा भी है, जो लोगों को प्रकृति और कृषि चक्र से जोड़ता है। सतुआ संक्रांति भारतीय संस्कृति की समृद्ध परंपराओं में से एक महत्वपूर्ण त्योहार माना जाता है।



