धर्म-आस्था

चैत्र नवरात्रि 2026 में शादी और मुंडन: क्या है शुभ-अशुभ का नियम?

चैत्र नवरात्रि हिंदू धर्म में अत्यंत पवित्र और आध्यात्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण पर्व माना जाता है। यह पर्व मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की उपासना का समय होता है, जिसमें भक्त पूरे मन से पूजा, व्रत और साधना में लीन रहते हैं। वर्ष 2026 में चैत्र नवरात्रि का विशेष महत्व और भी बढ़ जाता है, क्योंकि इस दौरान धार्मिक ऊर्जा और सकारात्मकता अपने चरम पर मानी जाती है। ऐसे में अक्सर लोगों के मन में यह सवाल उठता है कि क्या इन नौ दिनों में शादी, मुंडन जैसे मांगलिक कार्य करना शुभ होता है या नहीं।

धार्मिक शास्त्रों और ज्योतिष के अनुसार, नवरात्रि का समय मुख्य रूप से देवी साधना, आत्मशुद्धि और आध्यात्मिक उन्नति के लिए निर्धारित किया गया है। इन दिनों को “उपासना काल” कहा जाता है, जिसमें भौतिक और सांसारिक कार्यों की अपेक्षा ईश्वर भक्ति को प्राथमिकता दी जाती है। यही कारण है कि कई विद्वान और पंडित नवरात्रि के दौरान विवाह जैसे बड़े मांगलिक कार्यों से परहेज करने की सलाह देते हैं। उनका मानना है कि इस समय ग्रह-नक्षत्रों की स्थिति साधना के अनुकूल होती है, न कि वैवाहिक या सामाजिक उत्सवों के लिए।

हालांकि, सभी शास्त्र एकमत नहीं हैं। कुछ ज्योतिषाचार्यों का मानना है कि यदि किसी विशेष दिन शुभ मुहूर्त (अभिजीत मुहूर्त या अन्य शुभ योग) बन रहा हो, तो मुंडन जैसे छोटे संस्कार किए जा सकते हैं। मुंडन संस्कार को शुद्धिकरण और संस्कार का प्रतीक माना जाता है, इसलिए इसे नवरात्रि के पवित्र वातावरण में करना कुछ लोग उचित मानते हैं। लेकिन विवाह जैसे बड़े और सामाजिक आयोजन आमतौर पर टाले जाते हैं, क्योंकि इसमें उत्सव, संगीत और अन्य भौतिक गतिविधियां शामिल होती हैं, जो नवरात्रि के संयमित वातावरण के विपरीत मानी जाती हैं।

इसके अलावा, क्षेत्रीय परंपराएं भी इस विषय में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। कुछ स्थानों पर नवरात्रि में विवाह पूरी तरह वर्जित होता है, जबकि कुछ समुदायों में विशेष परिस्थितियों में इसकी अनुमति दी जाती है। इसलिए अंतिम निर्णय लेते समय परिवार की परंपरा, कुल गुरु या योग्य पंडित की सलाह लेना अधिक उचित माना जाता है।

निष्कर्षतः, चैत्र नवरात्रि के दौरान शादी जैसे बड़े मांगलिक कार्यों से बचना ही शास्त्रों के अनुसार अधिक उचित माना गया है, जबकि मुंडन जैसे छोटे संस्कार सीमित रूप में और शुभ मुहूर्त में किए जा सकते हैं। यह समय भक्ति, साधना और आत्मिक उन्नति का होता है, इसलिए इसे उसी भावना से मनाना सबसे श्रेष्ठ माना जाता है।

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