
भगवान गणेश की पूजा में तुलसी पत्र अर्पित नहीं किया जाता, और इसके पीछे धार्मिक तथा पौराणिक मान्यताएं जुड़ी हुई हैं। शास्त्रों के अनुसार तुलसी माता और भगवान गणेश से संबंधित एक कथा का उल्लेख मिलता है, जिसमें दोनों के बीच हुए एक प्रसंग के कारण तुलसी को गणेश पूजा में निषिद्ध माना गया।
मान्यता है कि तुलसी माता ने एक बार भगवान गणेश को विवाह का प्रस्ताव दिया था, जिसे उन्होंने अस्वीकार कर दिया था। इसके बाद तुलसी माता ने उन्हें श्राप दिया, और गणेश जी ने भी तुलसी को दो विवाहों का श्राप दिया। इसी कारण से गणेश पूजा में तुलसी का उपयोग वर्जित माना जाता है।
धार्मिक विद्वानों के अनुसार, यह परंपरा श्रद्धा और मान्यताओं पर आधारित है। गणेश पूजा में सामान्यतः दूर्वा, लाल फूल और मोदक का विशेष महत्व होता है, जिन्हें अत्यंत शुभ माना जाता है।



