हरियाणा की बॉक्सर पूजा बोहरा की कहानी: चुनौतियों के बावजूद जीता मेडल, पति की प्रेरणा बनी ताकत

हरियाणा को देश का “स्पोर्ट्स पावरहाउस” कहा जाता है, और खासतौर पर बॉक्सिंग के क्षेत्र में इस राज्य ने कई विश्वस्तरीय खिलाड़ी दिए हैं। इन्हीं में से एक नाम है पूजा बोहरा, जिन्होंने हाल ही में वर्ल्ड बॉक्सिंग चैंपियनशिप में मेडल जीतकर भारत का मान बढ़ाया। हालांकि इस सफलता तक का सफर आसान नहीं था। हार, चोटें और सामाजिक दबाव — इन सभी चुनौतियों के बावजूद पूजा ने हार नहीं मानी।
पूजा बोहरा ने खुद स्वीकार किया कि बॉक्सिंग जैसे खेल में महिलाओं को अब भी कई मानसिक और सामाजिक अवरोधों का सामना करना पड़ता है। हरियाणा का बॉक्सिंग कल्चर बहुत मजबूत है, लेकिन वहां की सामाजिक संरचना अब भी महिला खिलाड़ियों को पूरी तरह से सपोर्ट नहीं करती। पूजा कहती हैं कि उन्होंने कई बार खुद को टूटा हुआ महसूस किया, लेकिन उनके पति ने हर बार उन्हें संभाला और प्रेरित किया।
उनके अनुसार, एक खिलाड़ी के जीवन में हार का मतलब अंत नहीं होता, बल्कि वह एक नई शुरुआत का संकेत होता है। पूजा ने बताया कि जब वह एक अहम मुकाबला हार गई थीं, तो उन्होंने लगभग बॉक्सिंग छोड़ने का मन बना लिया था। लेकिन उनके पति ने उन्हें समझाया कि एक हार से जिंदगी की दिशा नहीं बदलती। उसी प्रेरणा के चलते पूजा ने अपने आप को फिर से तैयार किया और कड़ी मेहनत के दम पर अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत के लिए पदक जीता।
हरियाणा में बॉक्सिंग को लेकर बढ़ती प्रतिस्पर्धा, सुविधाओं की कमी और महिलाओं को लेकर पारंपरिक सोच अब भी बड़ी चुनौतियाँ हैं। पूजा बोहरा का मानना है कि अगर इन सामाजिक व मानसिक बाधाओं को हटाया जाए और खिलाड़ियों को सही दिशा में गाइड किया जाए, तो भारत कई ओलंपिक मेडल जीत सकता है।
पूजा की यह कहानी सिर्फ खेल की नहीं, बल्कि आत्मबल, प्रेरणा और परिवार के सहयोग की मिसाल है। वह आज लाखों लड़कियों के लिए एक रोल मॉडल बन चुकी हैं।



