डार्क वेब बना ATS के लिए चुनौती, हारिस के संदेश ट्रेस नहीं

डार्क वेब अब सुरक्षा एजेंसियों के लिए बड़ी चुनौती बनता जा रहा है। एंटी टेररिस्ट स्क्वॉड (ATS) हारिस से जुड़े संदेशों की पूरी जानकारी जुटाने में सफल नहीं हो पाई है, क्योंकि इनका आदान-प्रदान डार्क वेब के जरिए किया गया था। डार्क वेब की गुमनाम और एन्क्रिप्टेड प्रकृति के चलते ऐसे मामलों की जांच बेहद जटिल हो जाती है।
सूत्रों के मुताबिक, संदिग्ध गतिविधियों में शामिल लोग अब आम सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म की बजाय डार्क वेब का इस्तेमाल ज्यादा कर रहे हैं, जिससे उनकी पहचान और लोकेशन ट्रेस करना कठिन हो जाता है। ATS और अन्य एजेंसियां तकनीकी विशेषज्ञों की मदद से इन चुनौतियों से निपटने की कोशिश कर रही हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि डार्क वेब पर बढ़ती गतिविधियां राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा बन सकती हैं। ऐसे में एजेंसियों को अपनी तकनीकी क्षमता और निगरानी तंत्र को और मजबूत करने की जरूरत है, ताकि इस तरह के अपराधों पर प्रभावी नियंत्रण पाया जा सके।



