
उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सैनिकों के सम्मान और उनके राष्ट्र के प्रति समर्पण को लेकर बड़ा संदेश दिया है। उन्होंने कहा कि सैनिक की सेवा भले ही एक दिन समाप्त हो जाए, लेकिन उसका राष्ट्रप्रेम कभी रिटायर नहीं होता। मुख्यमंत्री ने सैनिकों के योगदान को देश की सुरक्षा और गौरव से जोड़ते हुए उनके सम्मान की प्रतिबद्धता दोहराई।
मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि देवभूमि उत्तराखंड का सैनिकों और वीर परिवारों के साथ गहरा संबंध रहा है। राज्य के हजारों परिवार सेना और सुरक्षा बलों से जुड़े रहे हैं। ऐसे में सैनिकों का सम्मान केवल एक औपचारिकता नहीं, बल्कि उत्तराखंड की परंपरा और संस्कार का हिस्सा है।
उन्होंने कहा कि देश की सीमाओं की रक्षा करने वाले जवान कठिन परिस्थितियों में भी अपने कर्तव्य से पीछे नहीं हटते। उनके त्याग, साहस और समर्पण के कारण देशवासी सुरक्षित जीवन जी पाते हैं। इसलिए सरकार का दायित्व है कि सैनिकों और उनके परिवारों के हितों को प्राथमिकता दी जाए।
मुख्यमंत्री ने सैनिकों और पूर्व सैनिकों के कल्याण के लिए सरकार की प्रतिबद्धता दोहराते हुए कहा कि वीर जवानों के सम्मान में केवल शब्द नहीं, बल्कि ठोस फैसले भी जरूरी हैं। सैनिकों से जुड़े कल्याणकारी कार्यों को आगे बढ़ाने पर सरकार लगातार काम कर रही है।
उत्तराखंड में सैनिक सम्मान का मुद्दा विशेष महत्व रखता है। राज्य की बड़ी संख्या में आबादी सेना और पूर्व सैनिक समुदाय से जुड़ी है। ऐसे में मुख्यमंत्री का यह बयान सैनिक परिवारों के साथ सरकार के जुड़ाव और उनके प्रति सम्मान को रेखांकित करता है।
सीएम धामी के इस संदेश में सैनिकों के बलिदान और राष्ट्रसेवा के प्रति सम्मान का भाव प्रमुखता से सामने आया। उन्होंने स्पष्ट किया कि वर्दी उतरने के बाद भी देश के प्रति सैनिक की जिम्मेदारी और उसका जज्बा समाप्त नहीं होता। सैनिक का राष्ट्रप्रेम जीवनभर कायम रहता है।



