अल्मोड़ा की कोसी नदी: 31 करोड़ खर्च, फिर भी अधूरी सीवर लाइन

अल्मोड़ा की कोसी नदी क्षेत्र के लिए बेहद महत्वपूर्ण जलस्रोत है, लेकिन लंबे समय से नदी में प्रदूषण और सीवेज की समस्या चिंता का विषय बनी हुई है। नदी को स्वच्छ रखने और शहर के गंदे पानी को सीधे नदी में जाने से रोकने के लिए सीवर लाइन बिछाने की योजनाएं बनाई गईं।
रिपोर्ट के मुताबिक, करीब 24 वर्षों में 31 करोड़ रुपये खर्च होने के बावजूद सीवर लाइन योजना पूरी तरह धरातल पर नहीं उतर सकी है। लगभग 12 किलोमीटर लंबी प्रस्तावित सीवर लाइन का काम अधूरा रहने से परियोजना की उपयोगिता और कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
सीवर व्यवस्था अधूरी होने का सीधा असर कोसी नदी पर पड़ सकता है। शहर से निकलने वाला गंदा पानी यदि उचित उपचार के बिना नदी में पहुंचता है तो इससे पानी की गुणवत्ता प्रभावित होती है। इसका असर नदी पर निर्भर स्थानीय आबादी और पर्यावरण दोनों पर पड़ सकता है।
अल्मोड़ा में सीवर लाइन विस्तार के लिए पहले भी करोड़ों रुपये की परियोजनाएं प्रस्तावित की गई हैं। वर्ष 2022 में भी करीब 25.15 करोड़ रुपये की लागत से आठ किलोमीटर सीवर लाइन बिछाने की योजना की जानकारी सामने आई थी।
कोसी नदी को बचाने की कोशिशें पहले भी होती रही हैं। नदी के जलग्रहण क्षेत्र में बड़ी संख्या में गांव आते हैं और इसके संरक्षण को लेकर अलग-अलग स्तर पर अभियान और योजनाएं चलाए जाते रहे हैं।
ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब सीवर व्यवस्था के लिए लगातार धन खर्च किया जा रहा है, तो परियोजना को समय पर पूरा क्यों नहीं किया जा सका। अधूरी योजना के कारण न केवल सरकारी धन के इस्तेमाल पर सवाल उठते हैं, बल्कि नदी के संरक्षण का उद्देश्य भी प्रभावित होता है।
स्थानीय स्तर पर कोसी नदी को स्वच्छ रखने के लिए सीवर लाइन को जल्द पूरा करना और सीवेज ट्रीटमेंट की प्रभावी व्यवस्था सुनिश्चित करना जरूरी माना जा रहा है। इससे नदी में प्रदूषण कम करने के साथ अल्मोड़ा की जल सुरक्षा और पर्यावरण संरक्षण को भी मजबूती मिल सकती है।



