उत्तराखंड में 1132 सोलर प्लांट स्थापित, 210 MW क्षमता से 3500 लोगों को रोजगार

उत्तराखंड में सौर ऊर्जा अब सिर्फ बिजली उत्पादन का माध्यम नहीं रह गई है, बल्कि स्थानीय स्तर पर स्वरोजगार और रोजगार का नया जरिया भी बन रही है। मुख्यमंत्री सौर स्वरोजगार योजना के तहत जून 2026 तक प्रदेश में 1132 सौर ऊर्जा संयंत्र स्थापित किए जा चुके हैं। इनकी कुल क्षमता करीब 210 मेगावाट है और इन परियोजनाओं से 3500 से अधिक लोगों को प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष रोजगार मिलने की जानकारी सामने आई है।
टिहरी में सबसे ज्यादा सोलर प्लांट
योजना के तहत सौर ऊर्जा परियोजनाएं लगाने के मामले में टिहरी गढ़वाल सबसे आगे है। जिले में 369 सोलर प्लांट स्थापित किए गए हैं, जिनकी कुल क्षमता करीब 69 मेगावाट है। इसके बाद उत्तरकाशी में 227 और चंपावत में 144 सौर संयंत्र स्थापित किए गए हैं।
स्थानीय लोगों को स्वरोजगार से जोड़ने पर जोर
मुख्यमंत्री सौर स्वरोजगार योजना का उद्देश्य उत्तराखंड के स्थानीय निवासियों को सौर ऊर्जा क्षेत्र में उद्यमिता और स्वरोजगार के अवसर उपलब्ध कराना है। योजना के तहत अलग-अलग क्षमता के सोलर पावर प्लांट स्थापित किए जा रहे हैं। इससे ग्रामीण और पर्वतीय क्षेत्रों में स्थानीय स्तर पर आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देने की कोशिश की जा रही है।
पलायन रोकने में मदद की उम्मीद
उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों में रोजगार के सीमित अवसरों के कारण पलायन लंबे समय से चुनौती रहा है। ऐसे में सौर ऊर्जा परियोजनाओं के जरिए गांवों और पहाड़ी क्षेत्रों में आय के नए साधन विकसित होने से स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिल सकती है। सरकार इस योजना को युवाओं को अपने क्षेत्र में ही रोजगार और उद्यमिता से जोड़ने के महत्वपूर्ण माध्यम के रूप में देख रही है।
250 मेगावाट क्षमता का लक्ष्य
राज्य सरकार ने मुख्यमंत्री सौर स्वरोजगार योजना के तहत कुल 250 मेगावाट सौर ऊर्जा क्षमता विकसित करने का लक्ष्य रखा है। मौजूदा 210 मेगावाट क्षमता के बाद शेष परियोजनाओं पर काम आगे बढ़ाया जा रहा है। योजना के विस्तार से आने वाले समय में हरित ऊर्जा उत्पादन के साथ रोजगार के अवसर भी बढ़ने की उम्मीद है।
उत्तराखंड में सौर ऊर्जा का यह विस्तार पर्यावरण संरक्षण, स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन और स्थानीय रोजगार—तीनों मोर्चों पर महत्वपूर्ण माना जा रहा है। यदि योजना के तहत नए प्रोजेक्ट तेजी से पूरे होते हैं, तो राज्य की हरित ऊर्जा क्षमता के साथ ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी नई मजबूती मिल सकती है।



