CM Samriddhi Yojana: उत्तराखंड में 19 हजार युवाओं, महिलाओं और पूर्व सैनिकों को एग्री-बिजनेस ट्रेनिंग

उत्तराखंड में कृषि और औद्यानिकी को रोजगार तथा स्वरोजगार का आधार बनाने की दिशा में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी सरकार ने ‘सीएम-समृद्धि योजना’ शुरू की है। इसके तहत प्रदेश के सभी 95 विकासखंडों में करीब 19 हजार युवाओं, महिलाओं और पूर्व सैनिकों को एग्री-बिजनेस से जुड़ा प्रशिक्षण देने की तैयारी है। योजना का उद्देश्य लोगों को केवल खेती तक सीमित रखने के बजाय कृषि उत्पादों की पूरी वैल्यू चेन से जोड़ना है।
95 ब्लॉक में होगा प्रशिक्षण
योजना के तहत राज्य के सभी 95 विकासखंडों में प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। प्रत्येक ब्लॉक से करीब 200 प्रतिभागियों का चयन किया जाना है। इस हिसाब से कुल लगभग 19 हजार लोगों को प्रशिक्षण देने का लक्ष्य रखा गया है। योजना एक वर्ष के लिए संचालित की जा रही है और प्रशिक्षण मॉड्यूल तैयार किया जा रहा है।
इच्छुक अभ्यर्थी विभागीय पोर्टल के जरिए ऑनलाइन आवेदन कर सकेंगे। प्रतिभागी अपनी रुचि के अनुसार फसल या कृषि-औद्यानिकी गतिविधि का चयन कर सकेंगे। उपलब्ध जानकारी के अनुसार चयन ‘पहले आओ, पहले पाओ’ के आधार पर किया जाएगा।
खेती के साथ बिजनेस की ट्रेनिंग
इस योजना की खास बात यह है कि प्रशिक्षण केवल फसल उगाने तक सीमित नहीं रहेगा। प्रतिभागियों को उत्पादन के साथ पैकेजिंग, प्रसंस्करण, ब्रांडिंग और मार्केटिंग जैसे कारोबारी पहलुओं की जानकारी भी दी जाएगी। इसके लिए कृषि विशेषज्ञों, कृषि विश्वविद्यालयों, वैज्ञानिक संस्थानों और संबंधित विभागों के सहयोग से प्रशिक्षण टीमें तैयार की जाएंगी।
इन क्षेत्रों में बन सकते हैं कारोबार
उत्तराखंड की भौगोलिक और जलवायु परिस्थितियां कई कृषि-आधारित कारोबार के लिए अनुकूल हैं। योजना में फल-सब्जियां, मसाले, मिलेट, खाद्यान्न, दलहन-तिलहन, मशरूम, सगंध पौधे, जड़ी-बूटियां, चाय और शहद जैसे क्षेत्रों को उद्यमिता से जोड़ने की संभावनाएं हैं। खाद्य प्रसंस्करण को भी इसका अहम हिस्सा बनाया जा सकता है।
बैंक लोन पर 30% तक सब्सिडी
प्रशिक्षण पूरा करने के बाद अपना व्यवसाय शुरू करने वाले युवाओं को बैंक ऋण पर 30 प्रतिशत तक सरकारी अनुदान दिए जाने की बात सामने आई है। इससे कृषि आधारित नया कारोबार शुरू करने के लिए जरूरी शुरुआती पूंजी जुटाने में मदद मिल सकती है।
महिलाओं और पूर्व सैनिकों पर भी फोकस
योजना में युवाओं के साथ महिलाओं और पूर्व सैनिकों को भी प्रमुख लाभार्थी समूह में रखा गया है। इसका उद्देश्य कृषि-औद्यानिकी आधारित गतिविधियों के जरिए अलग-अलग वर्गों के लोगों को स्वरोजगार से जोड़ना है।
महिलाओं को कृषि उत्पादों की प्रोसेसिंग, पैकेजिंग और स्थानीय उत्पादों की ब्रांडिंग जैसे क्षेत्रों में उद्यम शुरू करने का अवसर मिल सकता है। वहीं पूर्व सैनिकों के अनुभव और अनुशासन का इस्तेमाल कृषि आधारित व्यवसायों में किया जा सकता है।
पलायन रोकने की कोशिश
उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों में रोजगार के सीमित अवसरों के कारण पलायन लंबे समय से चुनौती रहा है। सरकार कृषि, स्थानीय उत्पाद, खाद्य प्रसंस्करण और उद्यमिता को जोड़कर स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर पैदा करना चाहती है।
इस दिशा में कृषि-आधारित छोटे व्यवसाय गांवों और पहाड़ी क्षेत्रों में आय के वैकल्पिक स्रोत बन सकते हैं।
नौकरी लेने वाले नहीं, रोजगार देने वाले बनें युवा
सरकार की व्यापक रणनीति युवाओं को केवल सरकारी या निजी नौकरी की तलाश करने के बजाय रोजगार देने वाला उद्यमी बनाने की है। इसके लिए राज्य में पहले से चल रही उद्यमिता और स्वरोजगार योजनाओं के साथ कृषि-औद्यानिकी को जोड़ने पर जोर दिया जा रहा है।
कुल मिलाकर, सीएम-समृद्धि योजना का फोकस खेत से बाजार तक पूरी वैल्यू चेन तैयार करने पर है। अगर प्रशिक्षण, वित्तीय सहायता और बाजार से जुड़ाव प्रभावी ढंग से लागू होता है, तो 19 हजार युवाओं, महिलाओं और पूर्व सैनिकों के लिए कृषि को कारोबार में बदलने के नए अवसर बन सकते हैं।



