Haldwani Purification Row: रामलीला मैदान शुद्धीकरण मामले में FIR, अधिवक्ता की तहरीर पर अज्ञात के खिलाफ केस

हल्द्वानी के रामलीला मैदान में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे की रैली के बाद कथित शुद्धीकरण हवन को लेकर चल रहे विवाद में पुलिस ने अब FIR दर्ज कर ली है। महिला अधिवक्ता अंजू की तहरीर पर हल्द्वानी कोतवाली में अज्ञात लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है। पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है।
अधिवक्ता की तहरीर पर दर्ज हुई FIR
महिला अधिवक्ता अंजू ने इस मामले में 15 अगस्त को हल्द्वानी कोतवाली में तहरीर दी थी। उनका आरोप था कि खरगे की रैली के बाद रामलीला मैदान में शुद्धीकरण हवन कराया गया, जो उनके अनुसार जातिगत भावनाओं को आहत करने वाला कृत्य था। पुलिस ने अब इस शिकायत के आधार पर अज्ञात लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर ली है।
किन धाराओं में दर्ज हुआ मुकदमा?
पुलिस के अनुसार FIR में BNS की धारा 196 और 299 तथा SC/ST एक्ट की धारा 3(1)(r) के तहत मामला दर्ज किया गया है। इन धाराओं के तहत जातिगत आधार पर वैमनस्य, धार्मिक/सामाजिक भावनाओं से जुड़े आरोप और अनुसूचित जाति के व्यक्ति के अपमान से संबंधित पहलुओं की जांच की जा रही है।
अज्ञात लोगों की पहचान में जुटी पुलिस
FIR अभी अज्ञात लोगों के खिलाफ दर्ज की गई है। पुलिस अब घटना से जुड़े तथ्यों और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आरोपित लोगों की पहचान करने की कोशिश करेगी।
पुलिस अधिकारियों ने मामले की विस्तृत जांच की जिम्मेदारी वरिष्ठ स्तर पर सौंपे जाने की जानकारी दी है। उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक जांच एसपी क्राइम डॉ. जगदीश चंद्र को सौंपी गई है।
क्या है पूरा मामला?
यह विवाद 8 अगस्त 2026 को हल्द्वानी के रामलीला मैदान में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे की रैली के बाद कथित शुद्धीकरण अनुष्ठान किए जाने से जुड़ा है। कांग्रेस नेताओं ने इसे दलित समाज और खरगे के अपमान से जोड़ते हुए विरोध जताया।
दूसरी ओर, इस घटना को लेकर अलग-अलग पक्षों की ओर से अलग-अलग दावे सामने आए हैं। इसलिए पुलिस जांच पूरी होने से पहले किसी व्यक्ति या संगठन को घटना के लिए जिम्मेदार ठहराना उचित नहीं होगा।
पहले भी दर्ज हो चुकी है Zero FIR
इस मामले ने तब और तूल पकड़ा जब बेंगलुरु में भी एक Zero FIR दर्ज की गई थी। उसमें उत्तराखंड बीजेपी अध्यक्ष महेंद्र भट्ट और अन्य लोगों के नाम सामने आए थे। शिकायत में कथित शुद्धीकरण को जातिगत भेदभाव से जोड़कर आरोप लगाए गए थे।
उत्तराखंड पुलिस अब स्थानीय शिकायत और अन्य उपलब्ध रिकॉर्ड के आधार पर मामले की जांच कर रही है।
CCTV और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य भी होंगे अहम
मामले की सुनवाई के दौरान उत्तराखंड सरकार की ओर से हाईकोर्ट को बताया गया कि पुलिस जांच कर रही है और CCTV फुटेज तथा इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों को सुरक्षित रखा गया है। इससे जांच में घटना के वास्तविक क्रम और उसमें शामिल लोगों की पहचान करने में मदद मिल सकती है।
राजनीतिक विवाद भी बढ़ा
रामलीला मैदान का कथित शुद्धीकरण अब सिर्फ स्थानीय पुलिस जांच तक सीमित नहीं रहा है। कांग्रेस इस मुद्दे को दलित सम्मान और सामाजिक भेदभाव से जोड़कर लगातार उठा रही है। कांग्रेस नेताओं और सांसदों ने भी इस मामले में कार्रवाई की मांग की है।
वहीं, बीजेपी की ओर से घटना और उसके राजनीतिक अर्थ को लेकर अलग पक्ष रखा गया है। बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट ने बाद में अपने पहले के बयान को लेकर स्पष्टीकरण भी दिया था।
अब आगे क्या होगा?
FIR दर्ज होने के बाद पुलिस का अगला कदम घटना से जुड़े लोगों की पहचान, बयान दर्ज करना और उपलब्ध CCTV व इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों की जांच करना होगा। जांच में आरोपों की पुष्टि होने पर संबंधित लोगों के खिलाफ आगे कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।
हल्द्वानी रामलीला मैदान शुद्धीकरण विवाद में अब FIR दर्ज हो गई है। महिला अधिवक्ता अंजू की तहरीर पर अज्ञात लोगों के खिलाफ मामला दर्ज कर पुलिस ने जांच शुरू कर दी है। FIR में BNS और SC/ST एक्ट की धाराएं लगाई गई हैं। फिलहाल आरोपों की जांच जारी है और पुलिस साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई करेगी।



