Nainital Water Crisis: दूषित पानी से बीमारी पर हाईकोर्ट सख्त, अधिकारियों को लगाई फटकार

नैनीताल जिले के ज्योलीकोट और आसपास के गांवों में दूषित पेयजल से फैल रही जलजनित बीमारियों को लेकर उत्तराखंड हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। क्षेत्र में पीलिया, डायरिया और टाइफाइड जैसे मामलों के बीच लोगों के बीमार होने और मौतों की खबरों ने प्रशासन की चिंता बढ़ा दी है। हाईकोर्ट ने जिलाधिकारी समेत संबंधित अधिकारियों को तलब कर स्थिति पर जवाब मांगा है।
ज्योलीकोट में दूषित पानी से बीमारी
नैनीताल से सटे ज्योलीकोट और आसपास के गांवों में पिछले कुछ समय से जलजनित बीमारियों के मामले सामने आ रहे हैं। रिपोर्टों के मुताबिक गांजा, वीरभट्टी, छीणा, बेलुवाखान और सरियाताल समेत आसपास के क्षेत्रों में बड़ी संख्या में लोग बीमार हुए हैं। पीलिया, डायरिया और टाइफाइड के मामले सामने आने से ग्रामीणों में चिंता बढ़ गई है।
बीमारी से मौतों के बाद हाईकोर्ट सख्त
मामले की गंभीरता तब और बढ़ गई जब क्षेत्र में बीमारी से मौतों की खबर सामने आई। इसके बाद दायर जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने प्रशासन और संबंधित विभागों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए।
अदालत ने साफ पेयजल उपलब्ध कराने, प्रभावित लोगों के इलाज की व्यवस्था करने और पानी के स्रोतों की जांच कराने के निर्देश दिए हैं।
डीएम समेत कई अधिकारी तलब
हाईकोर्ट ने मामले की सुनवाई के दौरान नैनीताल के जिलाधिकारी, मुख्य चिकित्सा अधिकारी तथा जल संस्थान और पेयजल निगम के वरिष्ठ अधिकारियों को अदालत के समक्ष उपस्थित होने के निर्देश दिए।
अधिकारियों से बीमारी पर नियंत्रण के लिए उठाए गए कदमों और स्थायी समाधान की कार्ययोजना की जानकारी मांगी गई।
साफ पानी और बेहतर इलाज के निर्देश
अदालत ने प्रभावित गांवों में तत्काल संदूषण-मुक्त पेयजल उपलब्ध कराने पर जोर दिया। साथ ही बीमार लोगों को उचित चिकित्सा सुविधा देने और जरूरत पड़ने पर स्वास्थ्य सेवाओं को और मजबूत करने के निर्देश दिए गए हैं।
8 सितंबर की सुनवाई के बाद संबंधित विभागों को प्रभावित क्षेत्रों में पानी की गुणवत्ता और स्वास्थ्य व्यवस्था पर विशेष ध्यान देने को कहा गया। मामले की अगली सुनवाई 15 सितंबर को होने की जानकारी सामने आई है।
पानी के सैंपल की होगी जांच
मामले में पानी के स्रोतों और सप्लाई लाइन की जांच भी अहम है। हाईकोर्ट ने पानी के नमूने लेकर उनकी जांच कराने और रिपोर्ट पेश करने को कहा है।
प्रशासन की ओर से प्रभावित क्षेत्रों में स्वास्थ्य निगरानी और सैंपलिंग की कार्रवाई भी तेज की गई है। स्वास्थ्य विभाग ने मरीजों की जांच और उपचार के लिए स्वास्थ्य सेवाएं बढ़ाई हैं।
सीवर लीकेज की आशंका भी जांच के दायरे में
दूषित पेयजल के संभावित कारणों में पानी की पाइपलाइन में संदूषण और सीवर लीकेज जैसे पहलुओं की जांच की जा रही है। ग्रामीणों की शिकायतों के बाद जलापूर्ति व्यवस्था की निगरानी बढ़ाई गई है।
जब तक जांच पूरी नहीं होती, बीमारी के सटीक स्रोत के बारे में अंतिम निष्कर्ष निकालना जल्दबाजी होगा।
प्रशासन ने बढ़ाई निगरानी
बीमारी की स्थिति को देखते हुए प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की टीमें प्रभावित क्षेत्रों में पहुंच रही हैं। मरीजों की स्थिति की जानकारी लेने के साथ पानी और स्वास्थ्य संबंधी नमूने भी जुटाए जा रहे हैं।
अधिकारियों को यह सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं कि प्रभावित ग्रामीणों को इलाज और सुरक्षित पेयजल के लिए परेशानी न हो।
नैनीताल के ज्योलीकोट क्षेत्र में दूषित पेयजल से फैली बीमारी के मामले में हाईकोर्ट ने प्रशासन को कड़ी फटकार लगाई है। डीएम समेत संबंधित विभागों के वरिष्ठ अधिकारियों से जवाब मांगा गया है। कोर्ट ने प्रभावित लोगों को साफ पानी, बेहतर इलाज और पानी के स्रोतों की जांच सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। अब अगली सुनवाई में प्रशासन की कार्रवाई और जांच रिपोर्ट पर अदालत की नजर रहेगी।



