उत्तराखंड हाईकोर्ट नैनीताल से हल्द्वानी होगा शिफ्ट, 30 हेक्टेयर जमीन मंजूर

उत्तराखंड हाईकोर्ट को नैनीताल से हल्द्वानी स्थानांतरित करने की लंबे समय से चल रही कवायद अब आगे बढ़ती दिखाई दे रही है। राज्य सरकार ने नए परिसर के लिए 30 हेक्टेयर जमीन उपलब्ध कराने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। रिपोर्टों के अनुसार प्रस्तावित परिसर हल्द्वानी के लामाचौड़ क्षेत्र में विकसित किया जाना है।
30 हेक्टेयर जमीन को मिली मंजूरी
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में हाईकोर्ट के नए परिसर के लिए 30 हेक्टेयर भूमि उपलब्ध कराने के प्रस्ताव पर मुहर लगाई गई। सरकार के इस फैसले को हाईकोर्ट शिफ्टिंग की दिशा में महत्वपूर्ण प्रशासनिक कदम माना जा रहा है।
इस फैसले के बाद नए परिसर के विकास से जुड़ी अगली प्रक्रियाओं को आगे बढ़ाया जा सकेगा। हालांकि, हाईकोर्ट कब तक पूरी तरह हल्द्वानी से काम शुरू करेगा, इसकी अंतिम समयसीमा इस फैसले से तय नहीं होती।
नैनीताल से हल्द्वानी शिफ्ट करने की जरूरत क्यों?
नैनीताल पहाड़ी और सीमित भौगोलिक क्षेत्र वाला शहर है। हाईकोर्ट से जुड़े अधिवक्ताओं, कर्मचारियों और मुकदमों के पक्षकारों की बढ़ती आवाजाही को देखते हुए लंबे समय से हल्द्वानी में बेहतर कनेक्टिविटी और सुविधाओं वाले बड़े परिसर की जरूरत की बात सामने आती रही है।
हल्द्वानी कुमाऊं क्षेत्र का प्रमुख मैदानी शहर है और सड़क तथा रेल कनेक्टिविटी के लिहाज से नैनीताल की तुलना में अधिक सुलभ माना जाता है। प्रस्तावित स्थानांतरण से अदालत से जुड़े लोगों के लिए आवागमन आसान होने की उम्मीद है।
नया परिसर कैसा होगा?
सरकार ने फिलहाल 30 हेक्टेयर भूमि उपलब्ध कराने की मंजूरी दी है। नए परिसर में अदालत की कार्यवाही के लिए आवश्यक भवनों के साथ प्रशासनिक और अन्य सुविधाओं को विकसित करने की योजना आगे की प्रक्रिया में तय होगी।
यह फैसला केवल हाईकोर्ट की इमारत बदलने तक सीमित नहीं है। नए न्यायिक परिसर के आसपास वकीलों, न्यायिक अधिकारियों, कर्मचारियों और आम लोगों के लिए आवश्यक बुनियादी सुविधाओं के विकास की भी जरूरत होगी।
पर्यावरण को लेकर भी सवाल
हाईकोर्ट के लिए जिस भूमि को मंजूरी दी गई है, उसे लेकर पर्यावरण से जुड़े सवाल भी उठे हैं। एक रिपोर्ट में दावा किया गया है कि प्रस्तावित स्थल पर करीब 15 हजार पौधों को हटाने की चिंता सामने आई है।
ऐसे में परियोजना के आगे बढ़ने के साथ विकास और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन बनाए रखना महत्वपूर्ण होगा।
क्या अभी हाईकोर्ट नैनीताल में ही है?
हां। फिलहाल उत्तराखंड हाईकोर्ट की आधिकारिक वेबसाइट अभी भी इसे “High Court of Uttarakhand at Nainital” के रूप में प्रदर्शित करती है और 2026 की हालिया अधिसूचनाएं भी नैनीताल स्थित हाईकोर्ट के नाम से जारी हुई हैं।
इसलिए 30 हेक्टेयर जमीन को मंजूरी मिलने का अर्थ यह नहीं है कि हाईकोर्ट तत्काल नैनीताल से बंद होकर हल्द्वानी में काम करने लगा है। यह स्थानांतरण की प्रक्रिया में एक महत्वपूर्ण कदम है।
क्या बदलेगा?
अगर पूरी परियोजना योजना के अनुसार आगे बढ़ती है, तो:
- हाईकोर्ट का नया परिसर हल्द्वानी में विकसित होगा।
- नैनीताल की जगह हल्द्वानी प्रमुख न्यायिक केंद्र के रूप में उभर सकता है।
- अधिवक्ताओं और वादकारियों के लिए मैदानी क्षेत्र से पहुंच आसान हो सकती है।
- नए परिसर के साथ अतिरिक्त बुनियादी ढांचे की जरूरत पैदा होगी।
- पर्यावरण और भूमि उपयोग से जुड़े मुद्दों पर भी ध्यान देना होगा।
नोट: 30 हेक्टेयर भूमि की मंजूरी हाईकोर्ट स्थानांतरण की प्रक्रिया का महत्वपूर्ण चरण है। उपलब्ध आधिकारिक हाईकोर्ट रिकॉर्ड में अगस्त 2026 तक संस्थान का पता नैनीताल ही दर्ज है, इसलिए स्थानांतरण को पूरा हुआ मानना अभी उचित नहीं होगा।



