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ट्रेन की पटरियां चोरी करना क्यों है नामुमकिन? हैरान कर देने वाली सच्चाई

अक्सर आपने सुना होगा कि चोर बिजली के तार, लोहे के गेट, ढक्कन और यहां तक कि पुल के हिस्से तक चोरी कर लेते हैं, लेकिन एक सवाल लोगों के मन में हमेशा रहता है कि आखिर रेलवे ट्रैक से ट्रेन की पटरियां चोरी क्यों नहीं होतीं? इतना कीमती और मजबूत लोहा खुले में पड़ा रहता है, फिर भी चोर-उचक्के इसे छूने से क्यों डरते हैं। इसकी वजह जानकर वाकई आपको हैरानी होगी।

सबसे पहली और बड़ी वजह है पटरियों का अत्यधिक वजन। रेलवे की एक पटरी का वजन सैकड़ों किलो होता है। इसे उखाड़ने और उठाने के लिए भारी मशीनों, क्रेन और कई लोगों की जरूरत पड़ती है। अकेला या छोटा गिरोह इस काम को अंजाम ही नहीं दे सकता। इतना बड़ा ऑपरेशन करना बिना किसी की नजर में आए लगभग नामुमकिन है।

दूसरी अहम वजह है रेलवे सुरक्षा और निगरानी। रेलवे ट्रैक पर 24 घंटे निगरानी रहती है। गैंगमैन, ट्रैकमैन, आरपीएफ और जीआरपी लगातार गश्त करते रहते हैं। इसके अलावा कई इलाकों में सीसीटीवी और सेंसर लगे होते हैं, जो पटरियों में किसी भी तरह की छेड़छाड़ को तुरंत पकड़ लेते हैं। जरा-सी हलचल पर अलर्ट मिल जाता है और कार्रवाई शुरू हो जाती है।

तीसरी और सबसे डरावनी वजह है कानून का सख्त शिकंजा। रेलवे संपत्ति की चोरी को गंभीर अपराध माना जाता है। इसमें उम्रकैद तक की सजा और भारी जुर्माने का प्रावधान है। इतना ही नहीं, अगर पटरी चोरी के कारण कोई हादसा होता है, तो दोषियों पर हत्या जैसी धाराएं भी लग सकती हैं। यही वजह है कि अनुभवी चोर भी इस जोखिम को उठाने से कांपते हैं।

चौथी वजह तकनीकी है। रेलवे पटरियां खास तरह के स्टील से बनती हैं, जिन्हें आम कबाड़ी आसानी से खरीदने से मना कर देते हैं। इस स्टील की पहचान तुरंत हो जाती है, जिससे चोरी का माल बेच पाना बेहद मुश्किल हो जाता है।

इन सभी कारणों को मिलाकर देखा जाए तो साफ है कि रेलवे की पटरियां सिर्फ मजबूत ही नहीं, बल्कि कानून, तकनीक और सुरक्षा के मजबूत कवच में भी सुरक्षित हैं। यही कारण है कि खुले में होने के बावजूद ट्रेन की पटरियां आज भी चोरों की पहुंच से दूर हैं।

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