
संयुक्त राष्ट्र में हुई चर्चा के दौरान भारत ने एक बार फिर पाकिस्तान को कठोर शब्दों में आड़े हाथों लिया और अफगानिस्तान में निर्दोष बच्चों और महिलाओं की हत्या के मुद्दे को जोरदार तरीके से उठाया। भारत के प्रतिनिधि ने स्पष्ट कहा कि पाकिस्तान लगातार आतंकवादी समूहों को समर्थन देकर पूरे क्षेत्र में अस्थिरता फैलाने की कोशिश कर रहा है, और उसका यह रवैया अफगानिस्तान में मानवीय संकट को और गहरा कर रहा है। भारतीय प्रतिनिधि ने कहा कि पाकिस्तान की धरती से संचालित आतंकवादी संगठन न सिर्फ भारत बल्कि अफगानिस्तान की शांति, सुरक्षा और विकास के सबसे बड़े अवरोधक बन चुके हैं। संयुक्त राष्ट्र में दिए गए अपने बयान में भारत ने यह भी रेखांकित किया कि पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय मंचों पर खुद को शांति समर्थक दिखाने की कोशिश करता है, जबकि वास्तविकता यह है कि उसकी नीतियों ने अफगानिस्तान में अनगिनत परिवारों को तबाह किया है। भारत ने यह भी आरोप लगाया कि पाकिस्तान महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा की बात करता है, लेकिन जमीनी सच्चाई यह है कि उसकी नीतियाँ आतंकियों को संरक्षण देती हैं, जो आम नागरिकों पर हमले कर रहे हैं। इसके साथ ही भारत ने संयुक्त राष्ट्र से आग्रह किया कि वह आतंकवाद के खिलाफ ज्यादा मजबूत और सामूहिक प्रयास करे, ताकि निर्दोष लोगों की जान बचाई जा सके। भारत ने यह भी कहा कि अफगानिस्तान में स्थिरता तभी आएगी जब आतंकवाद को जड़ से खत्म किया जाएगा और उन देशों को कटघरे में खड़ा किया जाएगा जो आतंकवाद को बढ़ावा देते हैं। भारतीय प्रतिनिधि ने पाकिस्तान की लगातार दोहराई जाने वाली झूठी दलीलों पर करारा प्रहार करते हुए कहा कि पाकिस्तान विश्व समुदाय को गुमराह करने में लगा रहता है, लेकिन अब समय आ गया है कि अंतरराष्ट्रीय संस्थान इस दोहरे खेल को गंभीरता से लें। भारत ने चेतावनी देते हुए कहा कि आतंकवाद को पनाह देने वाले देशों पर सख्त कार्रवाई जरूरी है, वरना निर्दोष नागरिकों का खून बहना बंद नहीं होगा। संयुक्त राष्ट्र में भारत की यह सख्त प्रतिक्रिया न सिर्फ पाकिस्तान के दोहरे चरित्र को उजागर करती है, बल्कि यह भी बताती है कि क्षेत्र में शांति और स्थिरता को सुनिश्चित करने के लिए विश्व समुदाय को किस दिशा में ठोस कदम उठाने चाहिए।



