
नेपाल में बालेन शाह के प्रधानमंत्री बनते ही अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हलचल तेज हो गई है। अमेरिका ने तुरंत सक्रियता दिखाते हुए अपने राजदूत को काठमांडू भेजने का फैसला किया है, जबकि भारत भी स्थिति पर करीबी नजर बनाए हुए है। दूसरी ओर, चीन ने भी अपने दूत को नेपाल रवाना कर संकेत दिया है कि वह इस राजनीतिक बदलाव को गंभीरता से ले रहा है। दक्षिण एशिया में नेपाल की रणनीतिक स्थिति को देखते हुए यह घटनाक्रम क्षेत्रीय शक्ति संतुलन और कूटनीतिक प्रतिस्पर्धा को और दिलचस्प बना सकता है।
नेपाल के नए राजनीतिक परिदृश्य में बालेन शाह की भूमिका को लेकर वैश्विक शक्तियां अपने-अपने हितों को साधने में जुटी हैं। काठमांडू में बढ़ती कूटनीतिक गतिविधियां इस बात का संकेत हैं कि आने वाले समय में नेपाल की विदेश नीति में अहम बदलाव देखने को मिल सकते हैं। अमेरिका लोकतांत्रिक साझेदारी को मजबूत करने की कोशिश करेगा, जबकि भारत पारंपरिक रिश्तों और सुरक्षा हितों को प्राथमिकता देगा। वहीं, चीन अपनी बेल्ट एंड रोड पहल के जरिए नेपाल में निवेश और प्रभाव बढ़ाने पर जोर दे सकता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि बालेन शाह के नेतृत्व में नेपाल को संतुलित कूटनीति अपनानी होगी, ताकि वह तीनों शक्तियों के साथ संबंध बनाए रखते हुए अपने राष्ट्रीय हितों की रक्षा कर सके। यदि यह संतुलन सही तरीके से साधा गया, तो नेपाल क्षेत्रीय राजनीति में एक महत्वपूर्ण और स्वतंत्र भूमिका निभा सकता है।



