अफगानिस्तान में अफीम संकट: खेती 95% घटी, फिर भी स्टॉक और तस्करी से जारी है कारोबार

अफगानिस्तान में लंबे समय से चली आ रही अफीम की खेती में भारी गिरावट देखने को मिली है। रिपोर्टों के अनुसार, प्रतिबंधों और नीतिगत बदलावों के बाद देश में अफीम उत्पादन क्षेत्र में करीब 95 प्रतिशत तक कमी आई है। इसके बावजूद अफीम संकट पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है।
विशेषज्ञों के मुताबिक, वर्षों से जमा किए गए पुराने अफीम भंडार और पहले से सक्रिय तस्करी नेटवर्क अब भी अंतरराष्ट्रीय अवैध बाजारों को प्रभावित कर रहे हैं। खेती कम होने के बाद भी उपलब्ध स्टॉक और आपूर्ति श्रृंखला के कारण नशीले पदार्थों की समस्या बनी हुई है।
अफगानिस्तान लंबे समय तक दुनिया में अफीम उत्पादन के सबसे बड़े केंद्रों में शामिल रहा है। यहां की अर्थव्यवस्था के एक हिस्से में अफीम की खेती से जुड़े किसान और कारोबारी शामिल रहे हैं। खेती पर रोक के बाद कई ग्रामीण समुदायों के सामने आजीविका की चुनौती भी खड़ी हुई है।
संयुक्त राष्ट्र और अन्य अंतरराष्ट्रीय संस्थाएं अफगानिस्तान में नशीले पदार्थों के उत्पादन, तस्करी और इसके सामाजिक प्रभावों पर लगातार नजर रख रही हैं। उनका मानना है कि केवल खेती रोकना पर्याप्त नहीं है, बल्कि वैकल्पिक रोजगार और सीमा पार तस्करी रोकने के उपाय भी जरूरी हैं।
अफीम संकट अब केवल उत्पादन का नहीं, बल्कि पुराने भंडार, अंतरराष्ट्रीय मांग और संगठित तस्करी नेटवर्क का भी मुद्दा बन चुका है।



