पोलो: भारत का शाही खेल

पोलो को अक्सर विदेशी खेल समझा जाता है, लेकिन इसका जन्म भारत में हुआ था। मणिपुर राज्य में इसे ‘सागोल खोरुम’ कहा जाता था। यह खेल शाही परिवारों और योद्धाओं के बीच रणनीति और घुड़सवारी कौशल बढ़ाने के लिए खेला जाता था।
मणिपुर के स्थानीय लोग पोलो खेल में माहिर थे। खेल का उद्देश्य केवल गोल करना नहीं था, बल्कि टीम वर्क, संतुलन और घोड़े पर नियंत्रण का परीक्षण भी था। धीरे-धीरे ब्रिटिश अधिकारियों ने इस खेल को देखा और उसे इंग्लैंड में लोकप्रिय किया।
ब्रिटिश राज के दौरान पोलो को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पेश किया गया। इसके बाद यह खेल ऑस्ट्रेलिया, अर्जेंटीना और अमेरिका समेत कई देशों में फैल गया। मणिपुर और भारत की परंपरा ने ही पोलो को वैश्विक पहचान दिलाई।
आज भी मणिपुर में पोलो खेल की जड़ों का सम्मान किया जाता है। अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंट में भारतीय टीम की भागीदारी और मणिपुरी घोड़ों की विशेष पहचान इस खेल की शाही विरासत को जीवित रखती है।



