रुपया 10 साल में सबसे कमजोर: महंगा तेल और दबाव, भारत पर ‘डबल अटैक’

भारतीय अर्थव्यवस्था पर इस समय दोहरे दबाव की स्थिति बनती दिख रही है। एक तरफ रुपया 10 साल के सबसे कमजोर स्तर पर पहुंच गया है, तो दूसरी ओर अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी हो रही है। इन दोनों कारणों का सीधा असर देश की महंगाई और आयात बिल पर पड़ रहा है।
रुपये की कमजोरी का मतलब है कि भारत को आयात पर ज्यादा डॉलर खर्च करने पड़ रहे हैं, खासकर तेल और गैस जैसे जरूरी संसाधनों के लिए। चूंकि भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात करता है, इसलिए तेल की कीमतों में बढ़ोतरी और रुपये की गिरावट मिलकर “डबल अटैक” जैसी स्थिति बना रही है।
विशेषज्ञों के अनुसार, इसका असर आने वाले समय में पेट्रोल-डीजल की कीमतों, ट्रांसपोर्ट कॉस्ट और आम महंगाई पर भी दिखाई दे सकता है। हालांकि सरकार और RBI की ओर से स्थिति को संतुलित करने के लिए नीतिगत कदम उठाए जा सकते हैं, लेकिन वैश्विक बाजार की अस्थिरता फिलहाल चुनौती बनी हुई है।



