कौन थे कासिम दादा, जिनके नाम से बना Dada? अंग्रेजों ने L जोड़कर बनाया मशहूर ब्रांड

भारत में दशकों तक रसोई की पहचान रहे डालडा (Dalda) ब्रांड की कहानी काफी रोचक है। बहुत कम लोग जानते हैं कि इसके नाम के पीछे एक व्यक्ति और एक कारोबारी सफर जुड़ा हुआ है।
कहा जाता है कि डालडा नाम की शुरुआत कासिम दादा नाम के कारोबारी से जुड़े नाम से हुई। अंग्रेजों के दौर में जब वनस्पति घी का कारोबार शुरू हुआ, तब इस नाम को नया रूप दिया गया। इसमें ‘L’ अक्षर जोड़कर “Dalda” नाम बनाया गया, जो बाद में भारत के सबसे पहचाने जाने वाले खाद्य ब्रांडों में शामिल हो गया।
डालडा मूल रूप से वनस्पति घी का ब्रांड था, जिसे पारंपरिक घी के विकल्प के रूप में भारतीय बाजार में उतारा गया। इसकी पैकेजिंग, विज्ञापन और लंबे समय तक बाजार में मौजूदगी ने इसे घर-घर तक पहुंचा दिया।
एक समय ऐसा था जब डालडा का नाम वनस्पति घी का पर्याय बन गया था। शादी-ब्याह से लेकर रोजमर्रा के खाने तक, कई भारतीय परिवारों में इसका इस्तेमाल आम बात थी।
समय के साथ खाने की आदतों और स्वास्थ्य संबंधी प्राथमिकताओं में बदलाव आया, जिससे वनस्पति घी की लोकप्रियता प्रभावित हुई। इसके बावजूद डालडा भारतीय कारोबारी इतिहास के सबसे यादगार ब्रांड नामों में शामिल रहा है।
यह कहानी दिखाती है कि किसी ब्रांड का नाम, उसकी मार्केटिंग और समय के साथ बदलती उपभोक्ता पसंद किस तरह किसी उत्पाद को इतिहास का हिस्सा बना सकती है।



