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राधिका मर्चेंट ने Feminism पर कही दिल जीतने वाली बात

राधिका मर्चेंट ने हालिया बातचीत में फेमिनिज्म, शादी और महिला सशक्तिकरण पर अपनी राय साझा की। उन्होंने कहा कि पति-पत्नी हर मामले में एक जैसे नहीं हो सकते, लेकिन आपसी सम्मान के साथ रिश्ते में बराबरी कायम रह सकती है। उन्होंने महिलाओं की आर्थिक स्वतंत्रता को भी बेहद जरूरी बताया।

राधिका मर्चेंट ने Feminism पर कही दिल जीतने वाली बात

रिश्ते में बराबरी का मतलब आखिर क्या है? क्या पति-पत्नी को हर जिम्मेदारी और हर फैसले में बिल्कुल बराबर होना चाहिए? या फिर एक-दूसरे की क्षमताओं और भूमिकाओं का सम्मान करना ही असली समानता है?

इन सवालों पर राधिका मर्चेंट ने अपनी सोच साझा की है। अनंत अंबानी की पत्नी ने फेमिनिज्म और शादी पर बात करते हुए कहा कि किसी रिश्ते में दोनों पार्टनर हर क्षेत्र में एक जैसे नहीं हो सकते। किसी जगह एक व्यक्ति आगे हो सकता है और किसी दूसरी जगह दूसरा।

उनके मुताबिक, रिश्ते में सबसे जरूरी चीज आपसी सम्मान है।

राधिका बोलीं- हम अलग हैं, लेकिन बराबर हैं

राधिका ने बताया कि वह ऐसे पारिवारिक माहौल में बड़ी हुई हैं जहां मजबूत महिलाओं की मौजूदगी रही है। उन्होंने अपने मायके और ससुराल दोनों को मातृसत्तात्मक माहौल वाला बताया और अपनी मां तथा सास नीता अंबानी को मजबूत महिलाओं के रूप में याद किया।

फेमिनिज्म पर बात करते हुए उनका जोर इस बात पर था कि महिलाओं और पुरुषों को एक-दूसरे के खिलाफ खड़ा करने के बजाय दोनों को सम्मान और समान अधिकार की समझ दी जानी चाहिए।

उनका संदेश था कि पुरुष और महिलाएं अलग हो सकते हैं, लेकिन इसका अर्थ यह नहीं कि किसी एक की अहमियत दूसरे से कम है।

शादी में हर जगह बराबर होना जरूरी नहीं

राधिका ने अपनी और अनंत अंबानी की शादी का उदाहरण देते हुए कहा कि दोनों हर पहलू में एक जैसे नहीं हैं। कुछ मामलों में अनंत नेतृत्व करते हैं तो कुछ मामलों में वह खुद आगे रहती हैं।

इसके बावजूद दोनों एक-दूसरे के साथ सम्मान से पेश आते हैं और इसी वजह से वह अपने रिश्ते को बराबरी वाला मानती हैं।

यह बात रिश्तों के लिहाज से महत्वपूर्ण है, क्योंकि बराबरी का मतलब हमेशा काम, कमाई या जिम्मेदारियों को बिल्कुल 50-50 बांटना नहीं होता।

Feminism का मतलब महिलाओं को पुरुषों से ऊपर रखना नहीं

राधिका की बातों का एक अहम पहलू यह था कि फेमिनिज्म को पुरुष बनाम महिला की लड़ाई के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

एक स्वस्थ रिश्ते में दोनों लोगों को अपनी पसंद, क्षमता और परिस्थितियों के अनुसार योगदान देने की आजादी होनी चाहिए। कौन ज्यादा कमाता है या कौन किस क्षेत्र में ज्यादा नेतृत्व करता है, इससे ज्यादा जरूरी है कि दोनों की भूमिका को सम्मान मिले।

रिलेशनशिप विशेषज्ञों ने भी इसी बात पर जोर दिया है कि स्वस्थ रिश्तों में संतुष्टि अक्सर इस बात से जुड़ी होती है कि दोनों पार्टनर खुद को कितना महत्व दिया गया और सम्मानित महसूस करते हैं।

महिलाओं के लिए आर्थिक आजादी क्यों जरूरी?

राधिका ने महिलाओं की Financial Independence पर भी खास जोर दिया। उनका कहना था कि महिला चाहे किसी की बेटी हो, पत्नी हो या कितनी भी सुविधाजनक जिंदगी जी रही हो, उसके पास अपने फैसले लेने की आर्थिक क्षमता होनी चाहिए।

आर्थिक स्वतंत्रता का मतलब सिर्फ नौकरी करना नहीं है। इसका व्यापक अर्थ यह है कि महिला अपने आर्थिक फैसलों को समझ सके, अपनी जरूरतों के लिए दूसरों पर पूरी तरह निर्भर न हो और जरूरत पड़ने पर अपने जीवन से जुड़े महत्वपूर्ण फैसले खुद ले सके।

नीता अंबानी से मिली सीख?

राधिका ने अपनी सास नीता अंबानी का भी जिक्र किया और उन्हें मजबूत महिला बताया। उन्होंने कहा कि उनकी मां और सास दोनों ही ऐसी महिलाएं हैं जिन्हें अपने फैसलों और नेतृत्व के लिए किसी से अनुमति लेने की जरूरत नहीं पड़ती।

यही वजह है कि राधिका की बात को कई लोग महिला सशक्तिकरण के व्यापक विचार से जोड़कर देख रहे हैं।

रिश्ते में बराबरी कैसे कायम रखें?

राधिका की बातों से रिश्तों के लिए कुछ महत्वपूर्ण बातें सामने आती हैं—

  • पार्टनर की क्षमता और फैसलों का सम्मान करें।
  • हर काम को बिल्कुल 50-50 बांटना ही बराबरी नहीं है।
  • आर्थिक मामलों की जानकारी और स्वतंत्रता बनाए रखें।
  • महत्वपूर्ण फैसलों में एक-दूसरे की राय को महत्व दें।
  • रिश्ते में किसी एक व्यक्ति को हमेशा श्रेष्ठ या हमेशा अधीन न मानें।
  • मतभेद होने पर बातचीत और सम्मान को प्राथमिकता दें।

असली बराबरी सम्मान से आती है

राधिका मर्चेंट की बातों का सार यही है कि बराबरी का मतलब एक जैसा होना नहीं, बल्कि अलग होने के बावजूद समान सम्मान मिलना है।

पति-पत्नी के बीच जिम्मेदारियां अलग हो सकती हैं, कमाई अलग हो सकती है और किसी खास परिस्थिति में नेतृत्व भी एक व्यक्ति ज्यादा कर सकता है। लेकिन अगर दोनों को अपने फैसले लेने की आजादी और एक-दूसरे का सम्मान हासिल है, तो रिश्ता बराबरी की बुनियाद पर खड़ा हो सकता है।

निष्कर्ष:
राधिका मर्चेंट ने फेमिनिज्म को प्रतिस्पर्धा के बजाय सम्मान, समानता और स्वतंत्रता से जोड़कर देखा। उनकी बात का सबसे अहम संदेश यह है कि महिला सशक्तिकरण केवल अधिकारों की बात नहीं, बल्कि अपने जीवन के फैसले खुद लेने की क्षमता से भी जुड़ा है। वहीं शादी में बराबरी का अर्थ हर चीज को आधा-आधा बांटना नहीं, बल्कि दोनों पार्टनर को बराबर सम्मान और महत्व देना है।

 

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