जमशेदपुर SIR विवाद: वोटर लिस्ट से मुखिया का नाम गायब, जांच की मांग

झारखंड में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर जमशेदपुर में नया विवाद सामने आया है। बागबेड़ा इलाके में उस समय लोग हैरान रह गए, जब मतदाता सूची में स्थानीय मुखिया, उपमुखिया समेत कुछ जनप्रतिनिधियों के नाम दिखाई नहीं दिए। मामले के सामने आने के बाद स्थानीय स्तर पर इसे लेकर सवाल उठने लगे हैं।
बताया जा रहा है कि SIR प्रक्रिया के दौरान मतदाता सूची की जांच और सत्यापन किया जा रहा है। इसी दौरान कुछ ऐसे नाम भी सूची में नहीं मिले, जिनके संबंधित क्षेत्र में मतदाता होने का दावा किया जा रहा है। मुखिया और अन्य निर्वाचित प्रतिनिधियों के नाम गायब होने की खबर ने इस प्रक्रिया को लेकर चर्चा और तेज कर दी है।
स्थानीय लोगों और नेताओं का कहना है कि यदि निर्वाचित जनप्रतिनिधियों के नाम ही मतदाता सूची में नहीं मिल रहे हैं, तो आम मतदाताओं के नाम को लेकर भी सवाल खड़े हो सकते हैं। इसी वजह से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच और रिकॉर्ड का दोबारा सत्यापन कराने की मांग उठ रही है।
SIR के दौरान मतदाता सूची में नाम की स्थिति को लेकर झारखंड में पहले से ही लोगों के बीच काफी चर्चा है। स्थानीय स्तर पर मतदाताओं को अपने नाम की जांच करने और किसी तरह की गड़बड़ी मिलने पर संबंधित चुनाव अधिकारियों या BLO से संपर्क करने की सलाह दी जा रही है।
बागबेड़ा के मामले में अब नजर इस बात पर है कि मतदाता सूची से नाम गायब होने की वजह क्या है और क्या यह तकनीकी या रिकॉर्ड संबंधी समस्या है या सत्यापन प्रक्रिया के तहत किसी कारण से नाम सूची में शामिल नहीं हुआ। अंतिम स्थिति जांच और संबंधित चुनाव अधिकारियों के स्पष्टीकरण के बाद ही स्पष्ट होगी।
इस बीच, स्थानीय लोगों ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से मामले की जांच कराने की मांग की है। उनका कहना है कि मतदाता सूची से जुड़े किसी भी मामले में पारदर्शिता बेहद जरूरी है, क्योंकि इसका सीधा संबंध नागरिकों के मतदान के अधिकार से है।
नोट: किसी व्यक्ति का नाम किसी सूची में नहीं दिखना अपने-आप में अंतिम रूप से मतदाता अधिकार खत्म होने का प्रमाण नहीं है। मतदाताओं को आधिकारिक चुनाव रिकॉर्ड में अपनी स्थिति की पुष्टि करनी चाहिए।



