FSSAI का बड़ा एक्शन: इंफ्लुएंसर्स और सेलिब्रिटीज पर कसेगा शिकंजा

सोशल मीडिया के दौर में सेलिब्रिटीज और इंफ्लुएंसर्स किसी भी फूड प्रोडक्ट को लाखों लोगों तक आसानी से पहुंचा सकते हैं। ऐसे में फूड प्रोडक्ट्स से जुड़े भ्रामक दावों पर लगाम लगाने के लिए FSSAI ने सख्त रुख अपनाया है। खाद्य नियामक ने सेलिब्रिटीज और सोशल मीडिया इंफ्लुएंसर्स को चेताया है कि किसी भी उत्पाद का प्रचार करने से पहले उसके दावों की सत्यता और नियमों के अनुरूप होने की जांच करें।
FSSAI के मुताबिक किसी फूड प्रोडक्ट के बारे में ऐसा दावा नहीं किया जाना चाहिए, जिसे वैज्ञानिक या विश्वसनीय प्रमाण से सत्यापित न किया जा सके। खासकर इम्युनिटी बढ़ाने, पोषण संबंधी फायदे या स्वास्थ्य पर विशेष असर जैसे दावों को बिना पर्याप्त आधार के प्रचारित करना उपभोक्ताओं को गुमराह कर सकता है।
रेगुलेटर का संदेश साफ है कि किसी लोकप्रिय चेहरे की सिफारिश को देखकर उपभोक्ता अक्सर उत्पाद पर ज्यादा भरोसा कर लेते हैं। इसलिए इंफ्लुएंसर्स और सेलिब्रिटीज की जिम्मेदारी भी बढ़ जाती है। FSSAI ने कहा है कि ‘पहले सत्यापन करें, फिर प्रचार करें’ के सिद्धांत का पालन किया जाना चाहिए।
इस कार्रवाई का फोकस केवल विज्ञापन की भाषा पर नहीं, बल्कि फूड से जुड़े स्वास्थ्य दावों की विश्वसनीयता पर भी है। अगर किसी उत्पाद को लेकर ऐसा दावा किया जाता है कि वह बीमारी को रोकता है, इलाज करता है या शरीर पर कोई विशेष चिकित्सकीय प्रभाव डालता है, तो उसके लिए नियामकीय नियमों और वैज्ञानिक प्रमाणों का पालन जरूरी है।
FSSAI का यह कदम ऐसे समय में आया है जब सोशल मीडिया पर हेल्थ ड्रिंक्स, न्यूट्रिशन प्रोडक्ट्स, पैकेज्ड फूड और सप्लीमेंट्स को लेकर तरह-तरह के दावे तेजी से वायरल होते हैं। नियामक पहले भी खाद्य कंपनियों के भ्रामक लेबल और विज्ञापनों के खिलाफ कार्रवाई करता रहा है। हाल में कई कंपनियों के फूड प्रोडक्ट्स से जुड़े दावों की भी जांच और कार्रवाई की गई है।
अब सेलिब्रिटीज और इंफ्लुएंसर्स के लिए किसी फूड प्रोडक्ट को प्रमोट करते समय सिर्फ ब्रांड की जानकारी पर निर्भर रहना पर्याप्त नहीं होगा। उन्हें यह सुनिश्चित करना होगा कि उनके जरिए दी जा रही जानकारी सही, सत्यापित और लागू कानूनों के अनुरूप हो। भ्रामक या अप्रमाणित दावों को बढ़ावा देने पर कानूनी परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं।
कुल मिलाकर, FSSAI की यह चेतावनी उपभोक्ताओं को गलत स्वास्थ्य दावों और भ्रामक फूड विज्ञापनों से बचाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। इससे विज्ञापन करने वाले सेलिब्रिटीज और डिजिटल क्रिएटर्स की जिम्मेदारी भी पहले से ज्यादा बढ़ गई है।



