IVF Treatment: कब जरूरत पड़ती है और कैसे होता है पूरा इलाज?

IVF को लेकर कई कपल्स के मन में डर और भ्रम रहता है, लेकिन सही जानकारी के साथ इस उपचार को समझना आसान हो सकता है। IVF हर कपल के लिए पहला विकल्प नहीं होता। फर्टिलिटी की समस्या का कारण पता चलने के बाद डॉक्टर दवाओं, सर्जरी, IUI या IVF जैसे विकल्पों में से उचित उपचार चुनते हैं।
अगर लंबे समय तक नियमित असुरक्षित संबंधों के बावजूद गर्भधारण नहीं हो रहा है, तो फर्टिलिटी विशेषज्ञ से सलाह लेना जरूरी है। सामान्य तौर पर एक साल तक कोशिश के बाद जांच की सलाह दी जाती है, जबकि 36 वर्ष या उससे अधिक उम्र में डॉक्टर से पहले ही संपर्क करना उचित माना जाता है, क्योंकि उम्र के साथ महिला की प्रजनन क्षमता तेजी से कम हो सकती है।
कुछ स्थितियों में IVF की जरूरत अपेक्षाकृत जल्दी पड़ सकती है। फैलोपियन ट्यूब में ब्लॉकेज, गंभीर पुरुष बांझपन, कुछ मामलों में एंडोमेट्रियोसिस, ओव्यूलेशन से जुड़ी समस्याएं या लंबे समय से चल रही अनएक्सप्लेन्ड इनफर्टिलिटी इसके संभावित कारणों में शामिल हो सकते हैं। उपचार का फैसला हर कपल की मेडिकल स्थिति के अनुसार किया जाता है।
IVF कैसे होता है?
IVF की प्रक्रिया कई चरणों में पूरी होती है। शुरुआत में दवाओं की मदद से अंडाशय में एक से अधिक अंडे विकसित किए जाते हैं। इसके बाद अल्ट्रासाउंड और अन्य जांचों से फॉलिकल्स की निगरानी की जाती है और सही समय पर अंडे निकाले जाते हैं।
इसके बाद लैब में अंडे और शुक्राणु को मिलाकर निषेचन कराया जाता है। तैयार हुए भ्रूण में से उपयुक्त भ्रूण को कुछ दिनों बाद एक पतली ट्यूब की मदद से गर्भाशय में ट्रांसफर किया जाता है। अतिरिक्त उपयुक्त भ्रूण होने पर उन्हें भविष्य के उपचार के लिए फ्रीज भी किया जा सकता है।
IVF की सफलता हर व्यक्ति में एक जैसी नहीं होती। उम्र, फर्टिलिटी समस्या का कारण, BMI और अन्य स्वास्थ्य व जीवनशैली संबंधी कारक परिणाम को प्रभावित कर सकते हैं। इसलिए किसी एक व्यक्ति की सफलता दर को दूसरे व्यक्ति पर लागू नहीं किया जा सकता।
इसलिए IVF को लेकर घबराने के बजाय पहले दोनों पार्टनर्स की उचित जांच और विशेषज्ञ की सलाह लेना बेहतर है। कब IVF शुरू करना है, कितने प्रयास जरूरी हो सकते हैं और कौन-सा प्रोटोकॉल सही रहेगा—इनका फैसला फर्टिलिटी विशेषज्ञ आपकी व्यक्तिगत स्थिति के आधार पर करते हैं।



