
वंदे मातरम् को लेकर चल रहे राजनीतिक विवाद के बीच इससे जुड़े कानूनी प्रावधान भी चर्चा में हैं। संसद ने राष्ट्रीय गौरव अपमान निवारण (संशोधन) विधेयक, 2026 को पारित किया, जिसके बाद वंदे मातरम् को राष्ट्रीय गौरव अपमान निवारण अधिनियम, 1971 के तहत विशेष वैधानिक संरक्षण मिला। संशोधन का उद्देश्य राष्ट्रीय गीत के गायन को जानबूझकर रोकने या उसके दौरान व्यवधान डालने को दंडनीय बनाना है।
क्या है सजा? कानून के तहत वंदे मातरम् के गायन को जानबूझकर रोकने या इसे गाने वाली सभा में व्यवधान पैदा करने पर तीन साल तक की जेल, जुर्माना या दोनों का प्रावधान है। यह वही अधिकतम सजा है जो राष्ट्रीय गान से संबंधित ऐसे अपराध के लिए पहले से निर्धारित थी।
बार-बार अपराध करने पर क्या होगा? यदि कोई व्यक्ति दूसरी या उसके बाद की बार दोषी ठहराया जाता है, तो कम से कम एक साल के कारावास का प्रावधान लागू होगा। 2026 के संशोधन के बाद यह प्रावधान वंदे मातरम् से जुड़े संबंधित अपराधों पर भी लागू होगा।
कानून में सबसे बड़ा बदलाव क्या हुआ? पहले 1971 के कानून की धारा 3 में राष्ट्रीय गान के गायन को जानबूझकर रोकने या उसमें व्यवधान डालने के खिलाफ प्रावधान था। अब संशोधन के बाद इसी सुरक्षा का दायरा बढ़ाकर राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम् को भी इसमें शामिल किया गया है।
क्या हर तरह का विरोध या असहमति अपराध है? संशोधन में खास तौर पर जानबूझकर वंदे मातरम् का गायन रोकने या उसके गायन में जुटी सभा में व्यवधान डालने वाले कृत्यों को दंडनीय बनाया गया है। इसलिए केवल किसी राजनीतिक या वैचारिक मतभेद को स्वतः इस अपराध के बराबर नहीं माना जा सकता; कानून में बताए गए कृत्य और उनकी परिस्थितियां महत्वपूर्ण होंगी।
वंदे मातरम् को कानूनी संरक्षण देने का यह कदम इसे राष्ट्रगान जन गण मन के साथ वैधानिक सुरक्षा के समान दायरे में लाता है। सरकार के अनुसार, संशोधन का उद्देश्य राष्ट्रीय गीत के सम्मान और उसके सार्वजनिक गायन की गरिमा की रक्षा करना है।



