ऑफिस में तारीफ के बाद भी डर? जानें Imposter Syndrome
कई लोग ऑफिस में लगातार अच्छा प्रदर्शन करने और दूसरों से तारीफ मिलने के बावजूद अपनी उपलब्धियों को लेकर आश्वस्त महसूस नहीं कर पाते। उन्हें बार-बार यह डर सताता रहता है कि कहीं उनकी असली क्षमता सामने न आ जाए या लोग यह न समझ लें कि वे उतने सक्षम नहीं हैं, जितना उन्हें माना जा रहा है। ऐसे अनुभव को आम तौर पर Imposter Syndrome यानी इम्पोस्टर सिंड्रोम कहा जाता है।
इम्पोस्टर सिंड्रोम में व्यक्ति अपनी सफलता का श्रेय अक्सर अपनी मेहनत और क्षमता के बजाय किस्मत, सही समय या किसी बाहरी वजह को देने लगता है। उदाहरण के लिए, प्रमोशन मिलने पर भी उसे लग सकता है कि यह उसकी योग्यता की वजह से नहीं, बल्कि संयोग से हुआ है। इस तरह का लगातार आत्म-संदेह व्यक्ति के आत्मविश्वास और काम करने के तरीके को प्रभावित कर सकता है।
इस स्थिति का अनुभव हर व्यक्ति में अलग हो सकता है। कुछ लोगों को नई जिम्मेदारी मिलने पर असफल होने का डर रहता है, जबकि कुछ लोग छोटी-सी गलती को भी अपनी पूरी क्षमता पर सवाल मान लेते हैं। लगातार खुद पर अत्यधिक दबाव बनाना और हर उपलब्धि को कम आंकना भी ऐसे अनुभवों का हिस्सा हो सकता है।
अगर काम से जुड़ा डर, तनाव या आत्म-संदेह लगातार बना रहता है और रोजमर्रा के जीवन या कामकाज पर असर डालने लगता है, तो किसी मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ से बात करना मददगार हो सकता है। अपनी उपलब्धियों को वास्तविक तथ्यों के आधार पर देखना, सकारात्मक फीडबैक को स्वीकार करना और जरूरत पड़ने पर मदद लेना इस तरह के आत्म-संदेह से निपटने की दिशा में उपयोगी कदम हो सकते हैं।



