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क्रूड ऑयल से कंटेनर कार्गो तक, देश की अर्थव्यवस्था की धड़कन है भारत का सबसे बड़ा पोर्ट

भारत की आर्थिक मजबूती में समुद्री बंदरगाहों की भूमिका बेहद अहम है, और जब बात देश के सबसे बड़े बंदरगाह की होती है तो नाम आता है दीनदयाल बंदरगाह का, जिसे पहले कांडला पोर्ट के नाम से जाना जाता था। गुजरात के कच्छ जिले में स्थित यह बंदरगाह भारत के पश्चिमी तट पर रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण स्थान रखता है। इसे देश का ‘इकोनॉमिक गेटवे’ इसलिए कहा जाता है क्योंकि यहां से बड़े पैमाने पर आयात और निर्यात होता है, जो भारत की अर्थव्यवस्था को गति देता है। क्रूड ऑयल, पेट्रोलियम उत्पाद, कोयला, उर्वरक, खाद्यान्न, नमक, लोहे का स्क्रैप और विभिन्न प्रकार का कंटेनर कार्गो यहां से गुजरता है। खास तौर पर मध्य पूर्व से आने वाला कच्चा तेल बड़ी मात्रा में इसी बंदरगाह पर उतरता है, जिसे बाद में देश की रिफाइनरियों तक पहुंचाया जाता है।

दीनदयाल बंदरगाह की स्थापना वर्ष 1950 के दशक में की गई थी, जब भारत को विभाजन के बाद एक बड़े पश्चिमी बंदरगाह की जरूरत महसूस हुई। समय के साथ इसका विस्तार किया गया और आधुनिक सुविधाओं से लैस किया गया। यहां गहरे पानी की उपलब्धता बड़े जहाजों को ठहरने की सुविधा देती है, जिससे अंतरराष्ट्रीय व्यापार सुगम होता है। यह बंदरगाह रेल और सड़क नेटवर्क से देश के विभिन्न हिस्सों से जुड़ा हुआ है, जिससे माल की ढुलाई तेज और किफायती होती है। इसके आसपास विकसित विशेष आर्थिक क्षेत्र (SEZ) और औद्योगिक इकाइयां भी व्यापार को बढ़ावा देती हैं।

भारत के कुल समुद्री कार्गो हैंडलिंग में इस बंदरगाह की हिस्सेदारी महत्वपूर्ण मानी जाती है। पश्चिमी और उत्तरी भारत के राज्यों—जैसे राजस्थान, हरियाणा, पंजाब और दिल्ली—के लिए यह प्रमुख समुद्री द्वार है। यहां से निर्यात होने वाले उत्पादों में पेट्रोकेमिकल्स, कृषि उत्पाद और इंजीनियरिंग सामान शामिल हैं। वहीं आयातित वस्तुओं में कच्चा तेल, एलपीजी, कोयला और उर्वरक प्रमुख हैं। आधुनिक क्रेन, ऑटोमेटेड कार्गो सिस्टम और डिजिटल ट्रैकिंग जैसी सुविधाएं इसे तकनीकी रूप से उन्नत बनाती हैं।

देश की बढ़ती ऊर्जा जरूरतों और वैश्विक व्यापार में भारत की बढ़ती भागीदारी को देखते हुए दीनदयाल बंदरगाह का महत्व और भी बढ़ गया है। सरकार की सागरमाला परियोजना के तहत बंदरगाहों के आधुनिकीकरण और कनेक्टिविटी सुधार पर विशेष जोर दिया जा रहा है, जिससे लॉजिस्टिक्स लागत कम हो और निर्यात प्रतिस्पर्धी बने। यही कारण है कि यह बंदरगाह न केवल व्यापार का केंद्र है, बल्कि भारत की आर्थिक तरक्की का मजबूत आधार भी है। ‘इकोनॉमिक गेटवे’ की पहचान इसे यूं ही नहीं मिली, बल्कि दशकों से देश के विकास में इसके निरंतर योगदान ने इसे यह प्रतिष्ठा दिलाई है।

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