देश का पहला F1 ट्रैक: जेपी एसोसिएट्स का मास्टर प्लान और ₹18500 करोड़ का निवेश क्यों हुआ?

भारत में मोटरस्पोर्ट्स को नई पहचान दिलाने वाला देश का पहला फॉर्मूला-1 ट्रैक यानी बुद्ध इंटरनेशनल सर्किट सिर्फ एक रेसिंग ट्रैक भर नहीं था, बल्कि इसके पीछे एक बड़ा मास्टर प्लान छिपा हुआ था। इस प्रोजेक्ट को जेपी एसोसिएट्स ने साल 2011 में लॉन्च किया था और इस पर करीब ₹18,500 करोड़ का भारी-भरकम निवेश किया गया। सवाल उठता है कि आखिर कंपनी ने इतना बड़ा दांव क्यों लगाया? दरअसल, उस समय जेपी ग्रुप की योजना सिर्फ मोटरस्पोर्ट्स तक सीमित नहीं थी, बल्कि इस ट्रैक के जरिए ग्रेटर नोएडा और यमुना एक्सप्रेसवे क्षेत्र को एक ग्लोबल डेस्टिनेशन के रूप में विकसित करने का सपना देखा गया था।
जेपी एसोसिएट्स ने इस प्रोजेक्ट को रियल एस्टेट और इंफ्रास्ट्रक्चर से जोड़कर देखा था। कंपनी को विश्वास था कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आयोजित होने वाली रेसिंग से न सिर्फ भारत का नाम मोटरस्पोर्ट्स की दुनिया में रोशन होगा, बल्कि इस इलाके में बड़ी-बड़ी कंपनियों, विदेशी निवेश और रियल एस्टेट की डिमांड भी तेजी से बढ़ेगी। ट्रैक के आसपास टाउनशिप, मॉल, होटल और इंडस्ट्रियल हब खड़े करने की योजना थी। यानि यह प्रोजेक्ट दरअसल एक क्लस्टर डेवलपमेंट मॉडल था, जिसमें स्पोर्ट्स इवेंट्स केवल निवेशकों और खरीदारों को आकर्षित करने का जरिया भर थे।
हालांकि, हकीकत उम्मीदों से अलग रही। शुरुआती कुछ साल रेसिंग इवेंट्स के शोर-शराबे के बाद टैक्स और फंडिंग संबंधी चुनौतियों ने इस प्रोजेक्ट की रफ्तार धीमी कर दी। रियल एस्टेट सेक्टर में मंदी और जेपी ग्रुप की वित्तीय समस्याओं ने पूरे मास्टर प्लान को कमजोर कर दिया। बावजूद इसके, बुद्ध इंटरनेशनल सर्किट आज भी भारत की आधुनिकता और महत्वाकांक्षा का प्रतीक माना जाता है। यह ट्रैक इस बात का सबूत है कि अगर सबकुछ ठीक चलता, तो ग्रेटर नोएडा एशिया के सबसे बड़े मोटरस्पोर्ट्स और रियल एस्टेट हब में बदल सकता था।



