
Budget 2026 को लेकर देश के अलग–अलग सेक्टरों की निगाहें सरकार पर टिकी हुई हैं। खासतौर पर स्टार्टअप इकोसिस्टम ने इस बार बेहतर कैपिटल फ्लो और फंडिंग को आसान बनाने की मांग उठाई है। स्टार्टअप्स का कहना है कि शुरुआती और ग्रोथ स्टेज पर पूंजी की कमी उनके विस्तार में सबसे बड़ी बाधा बन रही है। ऐसे में वेंचर कैपिटल और प्राइवेट इक्विटी निवेश को प्रोत्साहन देने, टैक्स नियमों को सरल बनाने और एंजेल टैक्स जैसे मुद्दों पर राहत देने की उम्मीद जताई जा रही है।
इसके साथ ही क्लीन एनर्जी सेक्टर ने Budget 2026 में स्किलिंग पर विशेष ध्यान देने की मांग की है। रिन्यूएबल एनर्जी, इलेक्ट्रिक व्हीकल, ग्रीन हाइड्रोजन और एनर्जी स्टोरेज जैसे क्षेत्रों में प्रशिक्षित मानव संसाधन की भारी जरूरत है। इंडस्ट्री का मानना है कि यदि सरकार स्किल डेवलपमेंट प्रोग्राम, ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट और इंडस्ट्री–अकादमिक साझेदारी को बढ़ावा दे, तो भारत क्लीन एनर्जी में वैश्विक लीडर बन सकता है।
MSME सेक्टर ने सस्ते लोन और आसान क्रेडिट एक्सेस की मांग की है। छोटे उद्योगों का कहना है कि ब्याज दरों में राहत और गारंटी–आधारित लोन स्कीम्स से रोजगार सृजन को बढ़ावा मिलेगा। इसके अलावा जीएसटी अनुपालन को सरल बनाने और भुगतान में देरी की समस्या के समाधान की भी अपेक्षा जताई जा रही है।
कृषि क्षेत्र से जुड़े संगठनों ने किसानों की आय बढ़ाने के लिए इनपुट लागत कम करने, फसल बीमा को और प्रभावी बनाने तथा एग्री–टेक स्टार्टअप्स को प्रोत्साहन देने की मांग की है। वहीं इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर सरकार से पूंजीगत खर्च बढ़ाने, सड़क, रेल और शहरी विकास परियोजनाओं में तेजी लाने की उम्मीद कर रहा है।
आईटी और डिजिटल सेक्टर ने डेटा सेंटर, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और साइबर सिक्योरिटी में निवेश बढ़ाने की मांग रखी है। उनका मानना है कि इससे भारत की डिजिटल अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी। कुल मिलाकर Budget 2026 से स्टार्टअप, क्लीन एनर्जी, MSME, कृषि और इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे प्रमुख सेक्टरों को संतुलित समर्थन की उम्मीद है, ताकि आर्थिक विकास के साथ रोजगार और नवाचार को भी गति मिल सके।



