
ईरान में राजनीतिक माहौल एक बार फिर से तनावपूर्ण हो गया है। देश की सुरक्षा एजेंसियों ने विपक्ष और सुधारवादी खेमे से जुड़े कई प्रमुख चेहरों पर बड़ी कार्रवाई करते हुए उन्हें हिरासत में ले लिया है। गिरफ्तार किए गए लोगों में नोबेल शांति पुरस्कार से सम्मानित मानवाधिकार कार्यकर्ता नरगिस मोहम्मदी का नाम भी शामिल बताया जा रहा है। नरगिस लंबे समय से महिलाओं के अधिकार, मृत्युदंड के विरोध और लोकतांत्रिक सुधारों की मांग को लेकर मुखर रही हैं। अधिकारियों की इस कार्रवाई को सरकार विरोधी गतिविधियों पर सख्ती के रूप में देखा जा रहा है, जबकि मानवाधिकार संगठनों का कहना है कि यह असहमति की आवाज दबाने की कोशिश है।
रिपोर्टों के अनुसार हाल के दिनों में देश के भीतर बढ़ती राजनीतिक बहस, सामाजिक आज़ादी और शासन व्यवस्था में बदलाव की मांग तेज हुई थी। कई सुधारवादी नेताओं ने शांतिपूर्ण तरीके से अपने विचार रखे थे, लेकिन सरकार ने इसे कानून-व्यवस्था के लिए चुनौती माना। इसी के बाद छापेमारी और गिरफ्तारियों का दौर शुरू हुआ। नरगिस मोहम्मदी पहले भी कई बार जेल जा चुकी हैं और उनकी सेहत को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता जताई जाती रही है। इस बार की गिरफ्तारी ने फिर से वैश्विक समुदाय का ध्यान ईरान की आंतरिक स्थिति की ओर खींच लिया है।
संयुक्त राष्ट्र, यूरोपीय देशों और विभिन्न मानवाधिकार संस्थाओं ने घटनाक्रम पर नजर रखने की बात कही है। कई संगठनों ने मांग की है कि राजनीतिक विचारों के कारण किसी को भी प्रताड़ित न किया जाए और हिरासत में लिए गए लोगों को कानूनी अधिकार दिए जाएं। दूसरी ओर ईरानी प्रशासन का कहना है कि राष्ट्रीय सुरक्षा सर्वोपरि है और कानून का उल्लंघन करने वालों पर कार्रवाई जरूरी है। सरकार समर्थकों का तर्क है कि बाहरी शक्तियां देश के भीतर अस्थिरता पैदा करने की कोशिश करती रही हैं।
इन गिरफ्तारियों के बाद ईरान में आगे क्या राजनीतिक दिशा बनेगी, इस पर सबकी निगाहें टिकी हैं। सुधारवादी खेमे के समर्थकों का मानना है कि सख्ती से असंतोष कम नहीं होगा, बल्कि संवाद की जरूरत है। वहीं सत्तारूढ़ व्यवस्था अपने रुख पर कायम दिखाई दे रही है। ऐसे में आने वाले दिनों में अंतरराष्ट्रीय दबाव, कूटनीतिक प्रतिक्रियाएं और देश के भीतर जनता का रुख, सभी मिलकर स्थिति को प्रभावित कर सकते हैं। फिलहाल नरगिस मोहम्मदी समेत अन्य नेताओं की गिरफ्तारी ने ईरान में मानवाधिकार और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर बहस को और तेज कर दिया है।



