
देश में सहकारिता आंदोलन को नई गति देने के उद्देश्य से केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने राज्यों के सहकारिता मंत्रियों के साथ एक अहम बैठक की। इस बैठक में सहकारी समितियों को सशक्त बनाने, एथनॉल संयंत्रों की स्थापना को बढ़ावा देने, डिजिटल पारदर्शिता, और किसानों की आय बढ़ाने जैसे मुद्दों पर विस्तार से चर्चा हुई। बैठक में इस बात पर विशेष जोर दिया गया कि सहकारिता मॉडल को आधुनिक तकनीक और पारदर्शी व्यवस्थाओं के साथ जोड़ा जाए ताकि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिल सके। अमित शाह ने कहा कि सहकारिता केवल एक आर्थिक व्यवस्था नहीं, बल्कि सामाजिक समरसता और सामूहिक विकास का माध्यम है।
बैठक में एथनॉल संयंत्रों की स्थापना को लेकर राज्यों की भूमिका पर भी चर्चा हुई। केंद्र सरकार की नीति के अनुरूप गन्ना उत्पादक राज्यों में सहकारी चीनी मिलों के साथ एथनॉल उत्पादन को बढ़ावा देने की रणनीति पर विचार किया गया। इससे न केवल किसानों को उनकी उपज का बेहतर मूल्य मिलेगा, बल्कि देश की ऊर्जा आत्मनिर्भरता को भी बल मिलेगा। शाह ने निर्देश दिए कि राज्यों में लंबित परियोजनाओं को समयबद्ध तरीके से पूरा किया जाए और नई परियोजनाओं को शीघ्र स्वीकृति दी जाए।
इसके अलावा, सहकारी बैंकों में सुधार, सदस्यता अभियान, और प्राथमिक कृषि ऋण समितियों (PACS) के आधुनिकीकरण पर भी मंथन हुआ। बैठक में यह भी तय किया गया कि सहकारी संस्थाओं के कामकाज में पारदर्शिता लाने के लिए डिजिटल प्लेटफॉर्म का अधिकतम उपयोग किया जाएगा। शाह ने कहा कि सहकारिता मंत्रालय का लक्ष्य देश के हर गांव तक सहकारी ढांचे को मजबूत करना है, जिससे छोटे और सीमांत किसानों को सीधा लाभ मिल सके।
कुल मिलाकर यह बैठक सहकारिता क्षेत्र के व्यापक पुनर्गठन और विस्तार की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। एथनॉल संयंत्रों के जरिए हरित ऊर्जा को बढ़ावा, किसानों की आय में वृद्धि और ग्रामीण विकास को नई दिशा देने की कोशिश इस पहल के केंद्र में है। राज्यों के मंत्रियों ने भी केंद्र के साथ मिलकर सहकारिता क्षेत्र को नई ऊंचाइयों तक ले जाने का भरोसा जताया।



