
देश में लगातार बढ़ रहे सड़क हादसों और वायु प्रदूषण की समस्या से निपटने के लिए अब परिवहन विभाग आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित तकनीकों का सहारा लेने जा रहा है। इस नए विजन के तहत ट्रैफिक मैनेजमेंट, वाहन निगरानी, प्रदूषण नियंत्रण और सड़क सुरक्षा को स्मार्ट तकनीक से जोड़ा जाएगा। AI कैमरों और सेंसर के जरिए ओवरस्पीडिंग, रेड लाइट जंप, बिना हेलमेट या सीट बेल्ट के वाहन चलाने जैसी गतिविधियों पर रियल टाइम निगरानी रखी जाएगी। इससे न केवल नियम तोड़ने वालों पर तुरंत कार्रवाई संभव होगी, बल्कि दुर्घटनाओं की संख्या में भी कमी आएगी।
इसके साथ ही प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों की पहचान के लिए AI आधारित नंबर प्लेट रिकग्निशन सिस्टम और इमिशन मॉनिटरिंग तकनीक का उपयोग किया जाएगा। जो वाहन निर्धारित मानकों से अधिक धुआं छोड़ेंगे, उन्हें स्वतः चिन्हित कर नोटिस भेजा जाएगा। ट्रैफिक जाम की समस्या को कम करने के लिए स्मार्ट सिग्नलिंग सिस्टम लागू किया जाएगा, जो वाहनों के दबाव के अनुसार सिग्नल टाइमिंग को स्वतः नियंत्रित करेगा। इससे ईंधन की बचत होगी और कार्बन उत्सर्जन में कमी आएगी।
परिवहन विभाग का मानना है कि डेटा एनालिटिक्स के माध्यम से दुर्घटना संभावित क्षेत्रों की पहचान कर वहां विशेष सुरक्षा उपाय किए जा सकते हैं। ब्लैक स्पॉट्स पर अतिरिक्त संकेतक, स्पीड कंट्रोल और निगरानी व्यवस्था मजबूत की जाएगी। भविष्य में AI आधारित ड्राइवर असिस्टेंस सिस्टम और स्मार्ट पब्लिक ट्रांसपोर्ट नेटवर्क को भी बढ़ावा देने की योजना है। इस पहल से न केवल सड़कें अधिक सुरक्षित होंगी, बल्कि पर्यावरण संरक्षण को भी मजबूती मिलेगी। AI तकनीक के उपयोग से परिवहन व्यवस्था को पारदर्शी, जवाबदेह और आधुनिक बनाने की दिशा में यह एक बड़ा और दूरदर्शी कदम माना जा रहा है।



