
केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने 3 अक्टूबर 2026 को भोपाल में नए आपराधिक कानूनों पर आयोजित कार्यक्रम में न्याय व्यवस्था को लेकर बड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा कि नए कानूनों के पूर्ण क्रियान्वयन के बाद FIR दर्ज होने से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक न्याय की प्रक्रिया तीन साल के भीतर पूरी करने का लक्ष्य रखा गया है।
शाह ने कहा कि नए आपराधिक कानूनों में पुलिस, जांच और न्यायिक प्रक्रिया से जुड़ी समयसीमाओं पर जोर दिया गया है। उन्होंने यह भी बताया कि इन कानूनों में फॉरेंसिक जांच और तकनीक के इस्तेमाल को महत्वपूर्ण स्थान दिया गया है।
भारत में तीन नए आपराधिक कानून—भारतीय न्याय संहिता (BNS), भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) और भारतीय साक्ष्य अधिनियम—1 जुलाई 2024 से लागू हुए हैं। केंद्र सरकार के अनुसार इन कानूनों का उद्देश्य आपराधिक न्याय प्रक्रिया को अधिक समयबद्ध और तकनीक आधारित बनाना है।
शाह ने कहा कि नए कानूनों के तहत सात साल या उससे अधिक की सजा वाले अपराधों में फॉरेंसिक जांच से जुड़े प्रावधान किए गए हैं। उन्होंने यह भी कहा कि पूरी व्यवस्था के पूर्ण क्रियान्वयन के बाद आपराधिक न्याय प्रणाली में देरी कम करने और प्रक्रिया को अधिक व्यवस्थित बनाने में मदद मिलेगी।



