बजट उपयोग पर उठा सवाल: यूपी विधान परिषद में विपक्ष का जोरदार विरोध

उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर बजट खर्च का मुद्दा गरमा गया है। उत्तर प्रदेश विधान परिषद में बजट सत्र के दौरान विपक्ष ने सरकार पर निर्धारित बजट का पूरा उपयोग न करने का आरोप लगाया। प्रतिपक्ष के नेताओं ने विस्तृत आंकड़े पेश करते हुए दावा किया कि कई विभागों को आवंटित धनराशि समय पर खर्च नहीं हो पाई, जिससे विकास कार्य प्रभावित हुए हैं। विपक्ष का कहना है कि सरकार कागजों पर योजनाओं की घोषणा तो करती है, लेकिन धरातल पर उनका क्रियान्वयन अपेक्षित गति से नहीं हो रहा। परिषद में इस मुद्दे पर तीखी बहस देखने को मिली।
विपक्षी सदस्यों ने विशेष रूप से ग्रामीण विकास, स्वास्थ्य, शिक्षा और बुनियादी ढांचे से जुड़े विभागों का उल्लेख करते हुए कहा कि करोड़ों रुपये की धनराशि लैप्स हो गई या फिर अंतिम तिमाही में जल्दबाजी में खर्च की गई। उनका तर्क था कि यदि बजट का सही समय पर और सही दिशा में उपयोग होता, तो प्रदेश में रोजगार, स्वास्थ्य सुविधाओं और सड़क निर्माण जैसी योजनाओं का लाभ आम जनता को अधिक मिलता। प्रतिपक्ष ने वित्तीय अनुशासन और पारदर्शिता की मांग करते हुए सरकार से जवाबदेही तय करने को कहा।
सरकार की ओर से जवाब देते हुए वित्त विभाग के मंत्री ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताया। उनका कहना था कि बजट खर्च की प्रक्रिया निर्धारित नियमों के तहत होती है और कई बार तकनीकी कारणों, निविदा प्रक्रिया या पर्यावरणीय स्वीकृतियों के चलते धनराशि खर्च होने में विलंब होता है। मंत्री ने यह भी कहा कि राज्य की वित्तीय स्थिति मजबूत है और पूंजीगत व्यय में लगातार वृद्धि दर्ज की गई है। सरकार का दावा है कि पिछले वर्षों की तुलना में इस बार अधिक योजनाओं को समयबद्ध तरीके से पूरा किया गया है।
हालांकि विपक्ष अपने रुख पर कायम रहा और मांग की कि सभी विभागों के खर्च का विस्तृत श्वेत पत्र जारी किया जाए, ताकि जनता को वास्तविक स्थिति की जानकारी मिल सके। परिषद में हंगामे के बीच सभापति को कई बार हस्तक्षेप करना पड़ा। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आगामी चुनावों को देखते हुए बजट खर्च का मुद्दा और भी जोर पकड़ सकता है। फिलहाल, यह स्पष्ट है कि बजट उपयोग और विकास कार्यों की प्रभावशीलता आने वाले समय में उत्तर प्रदेश की राजनीति का अहम विषय बना रहेगा।



