
ग्रीनलैंड को लेकर अंतरराष्ट्रीय राजनीति एक बार फिर गरमा गई है। रूस ने पश्चिमी देशों को कड़ी चेतावनी देते हुए कहा है कि वे यह दावा करना बंद करें कि मॉस्को और बीजिंग ग्रीनलैंड को किसी प्रकार की धमकी दे रहे हैं। रूसी विदेश मंत्रालय के अनुसार, पश्चिम द्वारा लगाए जा रहे ऐसे आरोप पूरी तरह निराधार, भ्रामक और राजनीतिक एजेंडे से प्रेरित हैं। रूस का कहना है कि ग्रीनलैंड को लेकर सुरक्षा खतरे की बात फैलाकर पश्चिमी देश अपने सैन्य और रणनीतिक हितों को आगे बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं।
रूस ने साफ कहा कि उसका और चीन का ग्रीनलैंड पर कोई आक्रामक इरादा नहीं है। मॉस्को के मुताबिक, आर्कटिक क्षेत्र में सहयोग, पर्यावरण संरक्षण और अंतरराष्ट्रीय कानूनों का पालन ही उसकी प्राथमिकता रही है। रूस ने यह भी दोहराया कि आर्कटिक में शांति और स्थिरता बनाए रखना सभी देशों की साझा जिम्मेदारी है, न कि वहां तनाव बढ़ाना। रूसी अधिकारियों का मानना है कि पश्चिमी देश आर्कटिक को एक नए भू-राजनीतिक टकराव के क्षेत्र के रूप में पेश कर रहे हैं, जबकि हकीकत इससे अलग है।
ग्रीनलैंड, जो डेनमार्क के अधीन एक स्वायत्त क्षेत्र है, अपने भौगोलिक और रणनीतिक महत्व के कारण लंबे समय से वैश्विक शक्तियों के आकर्षण का केंद्र रहा है। यहां दुर्लभ खनिज संसाधन, ऊर्जा भंडार और महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग मौजूद हैं। इसी कारण अमेरिका और उसके सहयोगी देशों की दिलचस्पी इस क्षेत्र में लगातार बढ़ी है। रूस का आरोप है कि पश्चिम ग्रीनलैंड के नाम पर डर का माहौल बनाकर नाटो की सैन्य मौजूदगी को आर्कटिक में मजबूत करना चाहता है।
रूस ने यह भी कहा कि चीन को लेकर फैलाए जा रहे डर भी इसी रणनीति का हिस्सा हैं। मॉस्को के अनुसार, बीजिंग ने भी आर्कटिक में हमेशा आर्थिक और वैज्ञानिक सहयोग की बात की है, न कि सैन्य टकराव की। रूस का मानना है कि पश्चिमी देश अपनी आंतरिक राजनीतिक और आर्थिक चुनौतियों से ध्यान हटाने के लिए बाहरी खतरे गढ़ रहे हैं।
अंत में रूस ने पश्चिम से अपील की कि वह जिम्मेदार रवैया अपनाए, बेबुनियाद आरोपों से बचे और आर्कटिक क्षेत्र को शांति, संवाद और सहयोग का क्षेत्र बनाए रखे। रूस ने स्पष्ट किया कि यदि पश्चिम इस तरह के दावे जारी रखता है, तो इससे वैश्विक तनाव और अविश्वास ही बढ़ेगा, जिसका नुकसान पूरी दुनिया को उठाना पड़ेगा।



