
पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर ग्रीनलैंड को लेकर कड़ा रुख अपनाते हुए कहा है कि “समय आ गया है, अब एक्शन लेना होगा।” उनके इस बयान ने अंतरराष्ट्रीय राजनीति में नई चर्चा को जन्म दे दिया है। ग्रीनलैंड, जो भौगोलिक रूप से विशाल और रणनीतिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण द्वीप है, लंबे समय से वैश्विक शक्तियों के लिए आकर्षण का केंद्र रहा है। आर्कटिक क्षेत्र में बढ़ती गतिविधियों, प्राकृतिक संसाधनों की संभावनाओं और सामरिक महत्व के कारण यह इलाका अमेरिका, रूस और चीन जैसी शक्तियों की नजर में है।
ट्रंप का यह बयान उनके उस पुराने रुख की याद दिलाता है, जब उन्होंने राष्ट्रपति रहते हुए ग्रीनलैंड को खरीदने का विचार सार्वजनिक रूप से रखा था। उस समय डेनमार्क और ग्रीनलैंड की सरकारों ने इस प्रस्ताव को सिरे से खारिज कर दिया था। हालांकि, ट्रंप का ताजा बयान यह संकेत देता है कि अमेरिका के भीतर ग्रीनलैंड को लेकर रणनीतिक सोच अब भी जीवित है। उनके समर्थकों का मानना है कि आर्कटिक क्षेत्र में सुरक्षा, ऊर्जा संसाधन और व्यापारिक मार्गों की दृष्टि से ग्रीनलैंड की भूमिका आने वाले दशकों में और बढ़ेगी।
विशेषज्ञों के अनुसार, जलवायु परिवर्तन के कारण आर्कटिक बर्फ पिघल रही है, जिससे नए समुद्री मार्ग खुल रहे हैं और खनिज संसाधनों तक पहुंच आसान हो रही है। ऐसे में ग्रीनलैंड की भौगोलिक स्थिति उसे वैश्विक रणनीति का अहम हिस्सा बनाती है। ट्रंप का “एक्शन” शब्द इस्तेमाल करना कूटनीतिक, सैन्य या आर्थिक दबाव की ओर इशारा माना जा रहा है, हालांकि उन्होंने किसी ठोस कदम का स्पष्ट उल्लेख नहीं किया है।
दूसरी ओर, डेनमार्क और ग्रीनलैंड की स्वायत्त सरकार पहले ही स्पष्ट कर चुकी हैं कि ग्रीनलैंड बिक्री के लिए नहीं है और वहां के लोगों का भविष्य उनके अपने हाथों में है। ग्रीनलैंड में स्वशासन की भावना मजबूत है और स्थानीय आबादी अपने प्राकृतिक संसाधनों और सांस्कृतिक पहचान को लेकर सजग है।



